सोमवार, 23 अप्रैल 2018

माली समाज की उत्पत्ति

By +91 94135 51068‬: 
         माली समाज की उत्पत्ति के बारे में यूं तो कभी एक राय नहीं निकली फिर भी विभिन्न ग्रंथो अथवा लेखा
- जोगा रखने वाले राव, भाट, जग्गा, बडवा, कवी भट्ट, ब्रम्ह भट्ट व कंजर आदि से प्राप्त जानकारी के अनुसार तमाम माली बन्धु भगवान् शंकर माँ पार्वती के मानस पुत्र है !               
       एक कथा के अनुसार दुनिया की उत्पत्ति के समय ही एक बार माँ पार्वती ने भगवान् शंकर से एक सुन्दर
बाग़ बनाने की हट कर ली तब अनंत चौदस के दिन भगवान् शंकर ने अपने शरीर के मेल से पुतला बनाकर
उसमे प्राण फूंके ! यही माली समाज का आदि पुरुष मनन्दा कहलाया ! इसी तरह माँ पार्वती ने एक सुन्दर कन्या को रूप प्रदान किया जो आदि कन्या सेजा कहलायी ! 
      तत्पश्चात इन्हें स्वर्ण और रजत से निर्मित औजार कस्सी, कुदाली आदि देकर 
एक सुन्दर बाग़ के निर्माण का कार्य सोंपा! मनन्दा और सेजा ने दिन रात मेहनत कर 
निश्चित समय में एक खुबसूरत बाग़ बना दिया जो भगवान् शंकर और पार्वती की 
कल्पना से भी बेहतर बना था! भगवान् शंकर और पार्वती इस खुबसूरत बाग़ को देख कर बहुत प्रसन्न हुये ! 
तब भगवान् शंकर ने कहा आज से तुम्हे माली के रूप में पहचाना जायेगा ! 
इस तरह दोनों का आपस में विवाह कराकर इस पृथ्वी लोक में अपना काम
संभालने को कहा !
             आगे चलकर उनके एक पुत्री और ग्यारह पुत्र हुये ! जो कुल बारह तरह के माली जाति में विभक्त हो गए! अत: माली समाज को इस उपलक्ष पर अनंत चौदस के दिन माली जयंती अर्थात मानन्दा जयंती मनानी है !
        
        By +91 94135 51068‬: माली लोग काश्तकारी यानी खेती करने में ज्यादा होशियार है 
क्योकिं वे हर तरह का अनाज, साग- पात, फलफूल और पेड़ जो मारवाड़ में होते है, उनको लगाना और तैयार करना जानते है। 
       इसी सबब से इनका दूसरा नाम बागवान है। बागवानी का काम मालियों या 
मुसलमान बागवानों के सिवाय और कोई नहीं जानता। माली बरखलाफ दूसरे करसों 
अर्थात् किसानों के अपनी जमीनें हर मौसम में हरीभरी रखते है। 
उनके खेतों में हमेशा पानी की नहरें बहा करती है और इस लिये ये लोग सजल गॉवों में ज्यादा रहते है। 
माली लोग अपनी पैदाइश महादेवजी के मैल से बताते है। इनकी मान्यता है कि जब महादेवजी ने 
अपने रहने के लिये कैलाशवन बनाया तो उसकी हिफाजत के लिये अपने मैल से पुतला बनाकर उस में जान डाल दी और उसका नाम ‘वनमाली’ रखा। 
      फिर उसके दो थोक अर्थात् वनमाली और फूलमाली हो गए। जिन्होनें वन अर्थात् कुदरती जंगलों की हिफाजत की और उनको तरक्की दी, वे वनमाली कहलाये और जिन्होनें अपनी अक्ल और कारीगरी से पड़ी हुई जमीनों में बाग और बगिचे लगाये और उमदा-उमदा फूलफल पैदा किये, उनकी संज्ञा फूलमाली हुई। 
पीछे से उनमें कुछ छत्री(क्षत्रिय) भी परशुराम के वक्त में मिल गये क्योंकि वे अपने पिता के वध का बैर लेने के 
लिये पृथ्वी को निछत्री (क्षत्रियविहीन) कर रहे थे। मुसलमानों के वक्त में इस कौम की और अधिक तरक्की हुई 
जबकि उनके डर से बहुत से राजपूत माली बनकर छुटे थे। 
      उस वक्त कदीमी मालियों के लिये ‘मुहुर माली’ का नाम प्रचलित हुआ अर्थात् पहले के जो माली थे, 
वे महुर माली कहलाने लगे। महुर के मायने पहले के है। महुर माली जोधपुर में बहुत ही कम गिनती के है। 
वे कभी किसी समय में पूर्व की तरफ से आये थे। 
       बाकी सब उन लोगों की औलाद है जो राजपूतों से माली बने थे इनकी 12 जातियॉ है 
जिनके नाम कच्छवाहा, पड़ियार, सोलंकी, पंवार, गहलोत, सांखला, तंवर, चौहान, भाटी, राठौड़, देवड़ा और दहिया है। 
माली समाज अपने विषय में इससे ज्यादा हाल नहीं जानते। ज्यादा जानने के लिये वे अपने भाटों का सहारा लेते है। जोधपुर में ब्रह्मभट्ट नानूराम इस कौम का होशियार भाट है। उसके पास मालियों का बहुत सा पुराना हाल लिखा हुआ है मगर माली लोग अपनी बेइल्मी के कारण अपने सही और गलत भाटों की सहीं परख नहीं कर पातें।
      मालियों के भाट उनका सम्बंध देवताओं से जोड़ते है और कहते है कि जब देवताओं और 
दैत्यों द्वारा समुन्द्र मथने से जहर पैदा हुआ था तो उसकी ज्वाला से लोगों का दम घुटने लगा। 
महादेव जी उसको पी गये, लेकिन उसे गले से नीचे नहीं उतारा। 
इस सबब से उनका गला बहुत जलने लगा था जिसकी ठंडक के लिये उन्होने दूब भी बांधी और सांप को भी गले से लपेटा। लेकिन किसी से कुछ आराम न हुआ तब कुबेरजी के बेटे स्वर्ण ने अपने पिता के कहने से कमल के फूलों की माला बनाकर महादेवजी को पहनाई। उससे वह जलन जाती रही। 
महादेव जी ने खुश होकर स्वर्ण से कहा - हे वीर! तूने मेरे कण्ठ में वनमाला पहलाई है। 
इस से लोक अब तुझकों वनमाली कहेगे। 
महादेव जी से स्वर्ण को जब वरदान मिला तो सब देवता और दैत्य बहुत प्रसन्न हुए। उसे वे महावर पुकारने लगे। उन्होने भी उसकी प्रशंसा करके उसे अच्छे-अच्छे वरदान दिये.
जो माली समाज के लिए काम करेगा वही लिडर होगा

By ‪+91 94135 51068‬: Punam suman
        हम ये बताना चाहते हे की अगर हमारे समाज के प्रतिष्ठित और सम्मानित लोगो को अगर हम चुनकर आगे भेजते है ताकि वे कुप्रथा ओ को मिटाये ओर लोगों का साथ दे तथा अन्याय के खिलाफ आवाज ऊठायै ना की जो कोइ अच्छा कार्य करते है उसे राजनीति समझे।
       हम ये सब इनके लिए नही अपितु समाज के हर उन प्रतिष्ठित और सम्मानिय लोगो के लिए बोल रहे हे जो समाज मे बढे बढे पद पर समाज के ही लोगों के व्दारा भेजे जाते है। 
        हम समाज के लोग इन्है चुनते हे समाज के भले के लिए। अगर ये सब ही इसे राजनीति समझने लगे तो फिर हम और समाज के लोगों को ही क्यों ना राजनीति मे लाये। 
       हम चुनते हे प्रधान, सासद, विधायक ताकी माली समाज के होनै के नाते माली समाज की सैवा करेगे, लेकिन अगर ये सब पद मिलने के बाद अगर येसा बोलतै हे तो माली समाज से इन्हे सपोर्ट नही मिलेगा। 
       जो माली समाज के लिए काम करेगा वही मालि समाज का लिडर होगा।
नागौर के माली समाज ने रचा इतिहास
‪By  +91 78140 68251‬: 
          #सामूहिक_विवाह_सम्मेलन_में_नागौर_माली_समाज_ने_रचा_इतिहास_
नागौर माली सामूहिक विवाह सम्मेलन के मुख्य बिंदु
(1) प्रथम.प्रयास.में..80..जोड़े..सभी.को.दिलाया.8.वां.वचन कन्या.भूर्ण.हत्या.नही.होने.देंगे
(2) यातायात.नियमो.का.पालन.सभी.जोड़ो.को.बांटे.हेलमेट
(3) पांडाल.में.पॉलीथिन.के.स्थान.पर.ईको.फ्रैंडली.थैलो.का.उपयोग.किया.
(4) आयोजको.ने.सभी.जोड़ो.को.बांटे.पोधे.
(5) बारात.के.लिये.9.शहर.गांवों.से.मंगाई.85.घोड़ियां
(6) 80.दूल्हों.के.लिये.85.बेंड.वाले
(7) 170.हलवाइयो.ने.2.दिनों.45.हजार.लोगो.के.लिये.बनाया.खाना.4.टन.दही.की.छाछ
(8) 2.हजार.500.समाज.बंधुओ.ने.सम्भाला.मोर्चा
(9) 80.दूल्हों.की.2.किलोमीटर.लंबी.निकासी.51.जगह.
6 क्विंटल.पुष्प.बरसा.कर.किया.स्वागत
(10) 80.दूल्हों.की.निकासी.में.7.हजार.500.बाराती
(11) हर.दुल्हन.के.खाते.में.
..............10.हजार.दिया.बचत.का.संदेश
(12) इस.पुनीत.कार्य.में.समाज.बंधुओ.लगभग.45.लाख.की.दी.बान
जोड़ने की बात करता है माली समाज
By +91 78140 68251‬:
          रैली के माध्यम सेे ब्राह्मण, मीणा, गुर्जर,  दलित सब अपनी अपनी ताकत  का प्रदर्शन कर अपने अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे है,  वही राजस्थान में माली समाज ने कभी भी शक्ति प्रदर्शन कर देश को बांटने की बात नही की । ना ही अपने अधिकारों की बात की । जबकि सब जानते है कि माली समाज की संख्या राजस्थान में कितनी है ।
माली समाज हमेशा जोड़ने की बात करता है तोड़ने की नही, माली समाज सभी जातियों के साथ  घुला मिला समाज है चाहे वो दलित समाज हो, चाहे उच्च वर्ग हो । 
पर हित सरस धरम ना ही भाई ।
राजेन्द्र सुमन
राष्ट्रीय माली फाउंडेशन
कुशवाहा समाज : गलत इतिहास ?
By +91 87099 70447‬:   बामसेफी और अशोका क्लब के द्वारा कुशवाहा समाज को जो गलत इतिहास बताया जाता हैं उससे सावधान रहें ये जहर घोलकर कुशवाहा समाज को हिन्दू विरोधी बनाना चाहता हैं इससे सावधान रहें !
21 साल के आयु में चंद्रगुप्त द्वारा स्थापित साम्रज्य के पतन के कारण ये आईएएस और हर PCS के एग्जाम में यही 10 पॉइंट को फोकस करके लिखना पड़ता हैं ,इस महान साम्रज्य के पतन के लिए अशोक की नीतियों आंशिक रूप से दोषी था वरन अशोक ने सेना को कभी शांति सेना के रूप में नही बदला बल्कि सेना को वह हमेशा तुस्ट ,दुरस्त रखता था हालांकि बाद के शासकों न सेना पे ध्यान नही दे के वह विलासता पूर्ण जीवन की और अग्रसर हो गया !जिसके कारण राज दरबार मे साजिश होने लगा !
(1) आर्थिक संकट
(२)राज्य कर्मचारियों का अत्याचार
(३)योग्य उत्तराधिकारियों का अभाव
(४)राजदरबार के षड्यंत्र
(५)साम्राज्य का विकेंद्रीकरण
(६)साम्राज्य की विशालता
(७)विदेशी आक्रमण
(८)ब्राह्मणों का विरोध
(९)सैनिक कमजोरी
(१०)सरकारी कर्मचारियों में राजभक्ति का अभाव
एक वाक्य में कहा जाये सब समस्याओं की जड़ बौध्द भिक्षु था।।बौद्धिक कायरता मौर्य साम्राज्य की बर्बादी का मुख्य कारक था।। अशोक का धम्म सम्राज्य के पतन के लिए दोषी नही था चूंकि अशोक का धम्म किसी धर्म रिलेटेड नही था वरन वह प्रजा में एक आमजनों के लिए एक संदेश देना का प्रयास किया था इसलिए अशोक का धम्म दोषी ना होकर बाद के राजा का अयोग्य होना था !

गुरुवार, 12 अप्रैल 2018


भुसावर न्यायिक मजिस्ट्रेट #ममता_सैनी जी का एसीजेएम पद पर प्रमोसन होने पर 
फुले ब्रिगेड के द्वारा स्वागत किया गया
बहुत बहुत शुभकामनाएँ
         सामाजिक चिंतन भाग-12
         समाज सुधार में सामूहिक विवाह का योगदान   
        रामचरित मानस में अयोध्या के नरेश दशरथ के चार पुत्रों एवं जनक की चार पुत्रियों का विवाह का प्रसंग है, जिसमें चारों पुत्रों का सामूहिक विवाह एक ही दिन एक ही केम्पस में दोनों परिवार ने रचाया था। समय-काल और परिस्थिति बदलती गई विवाह संस्कार भी मान- सम्मान प्रतिष्ठता का सूचक बनता गया और धूम-धाम से प्रत्येक परिवार अपने पुत्र-पुत्री का विवाह अलग से ही करने लगे और महिमा पंडित होने का क्षण भंगुर आन्नद उठाना एक रीति बन गई। 
           विवाह समारोह के लिए वर-वधु के परिवार दुसरों के मुकाबले और भी बेहतर खर्चिला-ताम-झाम से विवाह करने की होड़ में शामिल होने लगे। परिणाम स्वरूप जिनके पास धनबल आर्थिक सक्षमता मजबूत रही, उन्हें तो खर्च करने पर कोई फर्क नहीं पड़ा, किन्तु जो कमधन वाले मध्यम एवं कमजोर आर्थिक हैसियत वाले परिवार भी इस कुरीति के शिकार होकर अपने पुत्र-पुत्री का विवाह ऋण (उधारी) से पूँजी लेकर कर्ज एवं ब्याज के बोझ से दबते चले गये, अपनी सम्पूर्ण आमदानी से कर्ज का बोझ कम नहीं कर सके, जिसके कारण अपनी भू-सम्पत्ति बेचकर इज्जत बचाने की नौबत में फँस गये बच्चों को शिक्षित भी नहीं कर सके, अपनी आर्थिक हालात सुधारने में  पिछड़ते गये। और अनेक दुखों का सामना करना पडा। इस प्रकार विवाह में दहेज का दानव भी अपना कमाल करता गया, जिससे न अभिभावक सुखी और ना ही विवाहित जोड़े सुखी रहे, ऐसी विपत्ति का सामना करने हेतु मजबूरी पैदा हो गई।
         सामाजिक क्रान्ति के जनक महात्मा जोतिराव फुले एवं प्रथम शिक्षिका सावित्री माई फुले ने मानव समाज को इस खर्चिले एवं जटिल विवाह पद्धिति से छूटकारा दिलाने हेतु सत्यशोधक समाज की स्थापना कर विवाह ही नहीं जन्म से लेकर मृत्यु तक, एवं गृह प्रवेश जैसे संस्कार की नई रीति स्थापित कर दी। फुले द्वारा बताई गई पद्धति से मानव के खर्चिले संस्कारों को अपनी हैसियत से करने की रीति की स्थापना होने से मानव अपने बच्चों को शिक्षित प्रशिक्षित कर दुनिया की दौड़ में उन्नति के पथ पर अग्रसर होने का एक अवसर स्थापित कर दिया व अनेक परिवार बिना कर्ज ब्याज के विभिन्न संस्कार करने में सफल हुए।
           हमारे देश के हिन्दी भाषि प्रदेशों में भी किसी जागरूक समाज सुधारक की सलाह को मानकर समाज द्वारा विगत 30.40 दशक से सामूहिक विवाह करने का प्रचलन प्रारम्भ होकर समाज सुधार की दिशा को मजबूती प्रदान कर दी । परिणय स्वरूप विभिन्न जातियों में अब सामूहिक विवाह करने की होड़ मची हुई है। समाज सेवा का इस प्रकार का बड़ा काम सुलझे हुए परिवार जन करने लगे है। यह एक आदर्श सामूहिक विवाह पद्धति है जो निरन्तर बढ़ रही है। कई शिक्षित बच्चों ने स्वंय सामूहिक विवाह करने में रूचि ली, जिसके कारण अमीर मध्यम एवं कमजोर आर्थिक पक्ष के परिवार का विवाह खर्च बच गया सुखी जीवन का रास्ता मिल गया। ऐसे परिवार शिक्षित परिवार की श्रेणी में शामिल हो रहे है।
          अब तो कई प्रदेशों की सरकारो ने भी आदर्श सामूहिक विवाह करने वालों को अनुवाद स्वीकृत करना प्रारम्भ कर दिया है। अब अनेक जगह सरकारी अनुदान एवं सामाजिक सहयोग से आदर्श सामूहिक विवाह सम्पन्न होने लगे है। जो सहज-सरल और शान-शौकत वाला संस्कार साबित होने लगा है । अनेक जागरूक परिवार अब अनेक संस्कारों में फिजूल ख़र्ची करने से बचने लगे हैं, मृत्यु भोज तेजी से बन्द होने लगे है। मुण्डन संस्कार परिवारिक होने लगे, गृह प्रवेश में फिजूल ख़र्ची पर रोक लगा दी है, ऐसी अनेक कुरितियां समाप्त होने से मानव समाज प्रसन्नता पूर्वक जीवन यापन कर रहे है।
           समाज सुधार हेतु प्रत्येक व्यक्ति चिंतन कर कुरीतियाँ फिजूल ख़र्ची, झूठी शान बपने आप का महिपमण्डन जैसे संस्कारों का त्याग कर आदर्श मानव बनकर प्रगतिशील समाज की और आगे बढ़ाकर अपने बच्चों को उच्च शिक्षित कर अपनी प्रतिष्ठा बढ़ायें जो सुख-शान्ति का जीवन जीने में सहयोगी साबित हो।
           आइये हम भी अपने बच्चों का विवाह केवल सामूहिक विवाह समारोह में ही करने कुरितियाँ मिटाने का संकल्प लेकर मानव प्रगति में भागीदार बने।   
                                                           
                                            (रामनारायण चैहान)
                                                महासचिव
                                     महात्मा फुले समाजिक शिक्षण संस्थान
                               ।.103 ताज अर्पाटमेन्ट गाजीपुर दिल्ली- 96 
                                     

माली जाति छगु म्हसिका

 

– तिर्थ नारायण मालि

 
१. म्हसिका:-
                    नेपाल मण्डलय् दुने थी थी नेवा आदिवासी जातिपिं मध्यय् माली जाति नं छगु खः । थौं माली धका गुगु जाति यात धैइच्वन, उगु जाति यात प्राचिन ईलय् माली धागु खनेमदु । पुलांगु सफुलि थुगु जातिया मनुपिंत गथु, गाथा, व गनं गनं मालाकार धयातगु खनेदु । माली खँग्वः ला आर्यभाषाया मंका खँग्वः खनेदु । क्यबया ज्या याइम्ह, स्वाँमा हनिम्ह, स्वाँ मिम्ह, स्वाँया ज्या याइम्हेसित माली धायेगु याः । थौंकन्हे वया थगु जात कनेगु झ्वलय् थ्व जातिया मनुपिंसं माली, मालाकार, वनमाली, वनमाला धका थगु नांया ल्युने छुइगु याना च्वंगु दु । नेवाः समुदाय दुने लाःगु थ्व जाति थुबलेनिसें थन जुल धका तिथिमिति कुला धाये मफुसाँ किंरातकालया अन्तिम जुजु गास्थी माली खः धाइ । थ्व गास्थी नां अपभ्रंश जुया गथु वा गाथा जुगु धका पौरानिक बाखं न्यनेदु । थौं कन्हे नं स्वनिगःया पश्चिम पाखे च्वंगु  थक्वाः (थानकोत) बजारया उत्तर पाखाय् च्वंगु बुंइ धस्वाना च्वंगु ल्वहँ द्यःयात प्राचीन कालया माली तय्गु दुगुद्यः व वया भःचा क्वय् दुगु दोखुशी पारि (थौं कन्हे चिम्नि दुगु मालटारय् ) माली जुजु या लायकु दुगु थाय् धैच्वंगु दु । व लाःगाय् च्वना च्वपिं गोपाली त फुकस्यां हे व पुलांगु माली राज्य धाइगु पुलां खँ कना च्वंगु न्यनेदु । अथेहे थ्व जातिया पुर्खा मथुराय् च्वंपिं खः धाइ, हिन्दूतयसं श्री कृष्ण भगवान नापं नेपालय् वगु धाइ । थुकेंयाना थ्व जातिपिंत वनमाली व वनमालाकार जुगु तर्क न्यने दु ।  
 
                     बने वना थी थी जातजातिया स्वाँ हया मिगु समुदाययात वनमाली व वनमाला धायगु चलन दुसां, थगु हे बुंईं ह्वयेका थी थी धर्मया ज्या, समारोह, नित्य पूजा आदिया लागि स्वाँ, स्वाँमा मिपिंन्त माली व मालाकार धका धाइपिं नं दु । थ्व स्वाँया ज्या जुजु जयस्थीति मल्ल नं नेवाः तयत थी थी लजगा ज्वंका थी थी नां छुया जात दय्ेकुगु झ्वलय् दये्कुगु जुइमा ।  
 
                   थ्व जातियात नेपाल भाषां गथु वा गाथा धका नं म्हसिके याना च्वंगु दु । थ्व जाति गथु गथें जुल धका छगू रोचक प्रसङ्ग दु । थ्व प्रसङ्गयात गौतमबज्र बज्राचार्यं न्ह्याका तगु खँ भाजु इन्द्र मालींं वयकःयागु छगु च्वसुली च्वयादिगु दु । थ्व जाति न्हापां गणथुवा खः । थ्व हे गणथुवा शब्द अप्रभ्रंश जुया गथु खः । गणथुवाया अर्थ तान्त्रिक द्यःया हेरविचार याना नित्य पूजाआजा, यायेगु अख्तियार पावय् जुपिं वर्ग खः । तर गणथुवा पाखेँ गथु जुगु खँ यात नालय् मछि छाय धाःसाः द्यः थुवा च्वंनिपिं में में पिन्त गणथुवा धायगु यागु खनेमदु । थ्व हे गथु शब्दयागु व्यूत्पन्नयात कया शान्ति सुरभं  किरातकालीन साँस्कृृतिक अवशेष छगू चिन्तन धागु लेखय् च्वया तगु खनेदृु । शान्ति सुरभया भनाइ कथं गास्थीया सन्तान हे गथु खः । थ्व तथ्ययात अनुशीलन याना स्वयबले जुजु जयस्थिति मल्लं खुइप्यंगु जातया धलपौ दयेका थी थी लजगा ज्वंका जाति विभाजन याःबलय् गास्थीया सन्तान जुया थ्व जातियात क्वय् तगु धका धैगु नं न्यनेदु । मेगु कथं  गथु शब्दया व्यूत्पन्न “गमर्थ” शब्दं अपभ्रंस जुया वगु धका नं धाइ । 
 
                    लिच्छवी कालय् किरातीपिंत देश निकाला यायगु व क्वय लाकेगु ज्या जुवंगु खः धका नं धाइ । लिच्छवी नापं पराजित जुपि किराती तः सुद्र्यो लुया मवयकं शहरे दुहाः वयेमदु, अले सुद्र्यो बीवं शहरे दुने च्वने मदु धका वन्देज जुगु,  उकें याना थ्व जातियाम्ह छम्ह सिरि अजाजुयात यको हे तं प्याहां वल ।
 
                     झिगु देशय् तन्त्र साधना च्वंन्हयागु र पुरुषार्थी ज्या खः । शिक्षाया मत मचानि वं, स्वास्थ्यया लागि बैध मदुबलय् तन्त्र पाखें फुक्क ज्या जुइगु खः । उकिं अज्याःगु इलय् त्िनत्रकतयगु मयादा समाजय् उच्च जुइगु हे जुइ । अज्याःगु इलय् छन्हुं सिरि अजाजु जुजुया थाय् वना थ्व देय्या परम्परा हे मथुकुसे छु शासन याना दियागु धका धाल खनिसाः । थ्व खँ न्यना जुजुं धाल आ जिं छु सिकेमालसाः धका सिरि अजाजुयाके न्यनां दिल । जुजु यागु लिसः न्यना आजाजु यातः छु धाय छु धाय जुया च्वाकं क्न्हय सूर्य ग्रहण जुइगु स्युलाकी मस्यू धका न्यनी । थ्व खँ न्यना जुजुं दरबारे च्वंपि ज्योतिषपिन्त सता कन्हे सूर्य ग्रहण जुइकी मजुइ धका न्यनादिल । ज्योतिषपिंस नं थगु ज्योतिष शास्त्र अध्ययन याना कन्हे सूर्य ग्रहण मदु धका लिसबी । जुजु यात तं प्याहा वया कन्हे सूर्य ग्रहण मजुल धासाः छन्त पाला छ्वयेगु धका धया दिल । थगु बचन पुरा यायत सिरि अजाजु भद्रकाली द्यः थाय वना थगु साधना याना द्यःपिन्त गमंथना प्याखँ ल्हुइका दिल ।  प्याखँ हुइ सिधयका देवी जितछाय सता दियागु धका आज्ञा जुल । सिरि अजाजुं क्रन्हे सुर्य ग्रहण मजुल धासाः जुजुं थपिन्त पायेकीगु खँ फुक्क कनादिल । थ्व संकटं पार याना बिइत इनाप याना दिल । देवी नं सिरि अजाजु यागु इनाप यात स्वीकार याना कन्हे कुन्हु अजाजुं धागु हे ईलय् सुर्यग्रहण जुइधका वरदान बी । धाःथें हे कन्हेकुुन्हु सिरि अजाजुं धागु हे ईलय् सूर्यग्रहण जुल । सूर्य ग्रहण जुगु खना जुजु छक्क जुल । वहे इलय् छम्ह सिपाही नं सिरिअजाजु थगु तान्त्रिक विद्यायाना द्यः यातः जागेयाना वहे द्यः यागु खड्ग सुद्र्यो यात पनादिगु खँ कनादिल । थ्व खँ न्यना जुजु यात सिरि अजाजुयागु क्षमता यात स्वीकार याना द्यः यात गमःथने पूmम्ह जुगुलिं थाैिनसें गमथं जुल धका धया दिल । वहे ईलं निसें सिरि अजाजुया खलःयात गमथं धका धायेगु यात । कालान्तरय् वया गमथं शब्द गथ, गाथा अले गथु जुगु खः धैगु अन्वेषक तय्गु धापुदु । (श्रोत)
थ्व जातिया पुर्खौली लजगा बुँज्या नापं नापं तान्त्रिक ज्या नं खः । प्राचीन ईलय् थ्व जाति तन्त्र विद्याय् यक्व हे न्हयापिं धका धाइ । सिरि अजाजुयात तान्त्रिक शक्तिया रुपं कयातगु दु । अथे हे कलङ्कीमाइया बाय् हिला व्युम्ह तान्त्रिक नं माली जातिया छम्ह दुजं हे खः । पचली भैरव, बाघभैरव, भद्रकाली, नवदुर्गाया अष्टमातृका प्याखँ नं तान्त्रिक प्याखँ हे ख: । थ्व प्याखँया निंतिं तान्त्रिक ज्ञान मदयकं मगाः। थांैकन्हे तक नं थ्व जातिया दुजपिंसं तान्त्रिक साधना याना थी थी ज्या न्ह्याका च्वंगु खनेदु । थ्व जातियात नेवाः समाजय् चोखो जातिया रुपं कयातःगु खनेदु । छु जुया लंय्् स्वाँ कुटुवन धाःसाः वः स्वाँयात माली जातिया दुज नं ल्हातं थिलकी  द्यःयात छायेत  ज्यूजु व नीची जुगु झीगु समाजं भाः पिया व्वहारय् न्हायाका वया च्वंगु दु । 
 
                 थ्व जातिया बिस्कंगु वंशावली च्वयातगु थौंतक लुइके मफुनी । प्राचीन इलय् बालकुमारी व कलङ्कीमाइया वासस्थान थिमिइ जुयाच्वन । थ्व निम्ह देवीपिं अनेक रुपं यकोहे शक्तिशाली नं जुयाच्वन । थ्व द्यःया प्रभावं वः शहरय् यको हे सम्पन व उन्नति जुया च्वंगु जुया च्वन । यलः व येंय् च्वपिं निम्ह तान्त्रिकत मिलेजुया बालकुमारीयात यलाःय्, अले कलङ्कीमाइयात येंया असनय् हःगुजुल । कलङ्कीमाइयात असने च्वने मंमदगु जुल । उगु ईलय् विष्णुमती पारीया छगूजंगलय्  माली जाति पिंगु निवास दुगु जुया च्वंन । व तान्त्रिकयात कलङ्कीमाइ नं दर्शन बिया थः दुुुब्याना च्वंगु  शीला यात व हे तान्त्रिकया छें दुगु विष्णुमती पारि कलङ्कीया जंगलय् पलिस्था यायेत आज्ञा जुगु जुुल । उगु आज्ञा यात शिरोपर याना व तान्त्रिकं थःगु तन्त्र विद्यां पुजा याना  व द्यः दुब्याना च्वंगु शिलायात विष्णुमती पारि कलङ्कीया जंगलय् पलिस्था याना ब्युगु जुल  ।  
 
                  नेपालया वंशावलीइ माली जातिया बारे यक्व चर्चा जुया च्वंगु खनेमदु । अथे जुसां बेलायतया क्याम्ब्रिज विश्वविद्यालययागु सफु धुकुती ऋबिकक ःबचप ब्मम ज्ञढछद्द ९ब०  ज्ञज्ञ वंशावलिइ बुंगद्यः नेपालय् हयेत याःगु कुतः चर्चा यानातःगु थासय् थुगु कथं च्वया तगु दु । थ्व खँ यात ड्यानियल राइट्ं नं थगु सफुलिइ च्वया तगु दु :-
 
                “श्री करुणामय द्यःयात  हयेत वसपोलपिं (आचार्य, जुजु नरेन्द्रदेव, मालाकार छम्ह व मालीनी) जुजु बरदेव नाप बाया पूजासामाग्री ज्वना कपोतल पहादय् वन । अन बन्धुदत्तं तान्त्रिक पुुजा याना, पुरस्चरण व मन्त्र ब्वना अनेक विधि कथं कलशय् द्यः यात दुथ्याना अबलोकितेश्वर या नेपालय् बिज्याकुगु धाइ ।” ९ध्चष्नजत, ज्ञडठठस्  ०
 
थ्व जाति हिन्दू व बौद्ध निगू धर्म माने याना वयाच्वंगु खनेदु । थ्व जातिया मनूपिन्स थगु म्हय् द्यः दुबिका, में, दुगु, फाः हयँ, खाः, आदि बाँ कया बिस्कंगु धार्मिक—साँस्कृतिक गँ प्याखँ या परम्परा न्ह्याका वयाच्वंगु दु । पुलांगु झीगु सभ्यताया दुने मल्लकालं निसें न्ह्याना वयाच्वंगु झिनिदँय छक्वः पिदनिगु भद्रकालीया गँः प्याखँ, पचलि भैरवया प्याखँ, बाघ भैरवया प्याखँ अले दच्छि छक पिदनीगु थेच्वया नवदुर्गा प्याखँ व ख्वपया नवदुर्गा प्याखँ उकेयागु दसु खः । थ्व जातिंं थगु शक्ति परम्पराय् लिधंगु ख्वापाःपुया प्याखँ ल्हुया विश्वया न्ह्योने नेपायागु गरिमामय साँस्कृतिक म्हसिका व्वया च्वंगुु दु । थ्व जातियात बिशेष जातया रुपं कया तःगु दु । छाय्धासां थ्व जातिया मनूयाके याकंन हे द्यः दुभिगु याइ । थ्व जातं द्यःयातः थगु तन्त्र विद्यां बसय् काये फुपिधकाः नं धाइ । 
 
                 थ्व जातया मनूपिं आपायाना तान्त्रिक द्यःपिन्गु आसपास हे च्वनावया च्वंगु नं खनेदु । मनु ल्याचा कथं थ्व जाति यक्व मदुगु जुयाच्वंसाः नं सांस्कृतिया ख्यलय् दुधंगु ज्या याना वयाच्वंगु दु ।
     तान्त्रिक व शास्त्रीय प्याखँ ल्हुइतः ज्यासुवापिं थ्व जातिं न्हयाक वयाच्वंगु प्याखँ स्वयेबले  प्राचीन संस्कृति धका धायेफु । थ्व प्याखँ यागु म्हंया छांतकांत, ख्वापाः, तुतिचाल, शास्त्रीय बाजा व लय् स्वयबलय् प्राचीनकालं निसें न्ह्याना वया च्वंगु खनेदु । पूर्खां बिया थुकुगु थ्व म्वागु प्याखँ थ्व जातिया जक मखु थ्व देय्या हे छगू गौरव जुया च्वंगु खनेदु । 
 
२. थाँय्बाय् व मनु ल्या:-
 
                  माली जातिपिं निगु थायबाय् स्वनिगः दुने व गाँ गाँमें अप्पो खनेदु । स्वनिगः दुने नं दकले अपो येंय व किपु नगरपालिकाय् खनेदु  । येंय जक करिब ३५० छेंखा खनेदु । किपूया बाघ भैरव गुठी जक १२० छेंखा दु । थ्व छेंखाया ल्या मध्ये थौंकन्ह किपू ख्वपय् न्हापां निसें मूगय् गःछें, इनाचो, चोरचा, क्वाठण्डौ ज्या च्वंना वया च्वंगु दु । शहरपिने नंखेल, ताथली, साँखु, वनेपा आदि थासय् नै न्हपानिसें  बसोबास जुया च्वंगु दु । करिब ४० छेंखा नैकाप तिनथानाय्, १० छेंखा मच्छे गाँ, १० छेंखा का.म.पा ठमेलय् च्वना च्वंगु खनेदु ।
यलया थेच्वय् जक करिब २०० छेंखा, दँसी ७०, बुंङ्कय् ५०, अले यलःय् १५ छेंखा खनेदु । 
ख्वपया मालीतय्तः वनमाला धाइ । ख्वप दुने जकं ८० छेंखा च्वना वयाच्वंगु खनेदु । देय् दुने अप्व याना इनाचो, खंचा, नवदुर्गा द्यः छेंय् त्वालय च्वना च्वंगु खनेदु । व जिल्लाया ताथली गा.वि.सय् जक करिब २५ छेंखा खनेदु । अथें हे नंखेल धाइगु गांमें नं १० छेंखा वनमाला तःदु । व निगू गाँयापिं वनमाला त ख्वपया नवदुर्गा गुिथ नापं स्वापू दुुपिं खः । 
थौँकन्हे स्वनिगलं पिने नं आपाः थासय् थ्व जातिया मनुपिं च्वना च्वंगु खनेदु । अथें स्वनिगलं पिने च्वंवंपिं माली तः काभ्रे पलान्चोक, नुवाकोत, रसुवा, चितवन, पर्सा, मकवानपुर, सर्लाही, रुपन्देही, कास्की, धनुषा, मोरङ्क, सुनसरी, झापा आदि जिल्लाय् खनेदु । अथे हे मेमे गु जिल्लाय् नं माली जातिया मनुत च्वना च्वंगु न्यनेदु । नापं माली जातित थःगु उन्नतिया लागि बेलायत, अमेरिका, जापान थज्यागु तापा थाय् नं दु । थ्व जातिया मुक्कं ल्या थ्यंमथ्यं १०१६ छेंखा दैगु अनुमान दु । 
 
३. लजगा:-
                   लगजाःया रुपं म्हसीकेगु भ्mवलय् थ्व जातिया मूं लजगा न्हापाँ निसें स्वाँज्या खः । गथु जाति धालकी स्वाँ ज्या याइपिं धका म्हसीका वया च्वंगु दु । न्हापाः जुजु जययिस्थति मल्लया पाले थ्व जातयातः स्वाँ ज्या यायेत जिम्मा ब्युगु न्यनेदु । बने वना स्वाँ, स्वाँमाः वनस्पति, पुष्पंपत्रं (गथु जोलं) हया मीगु हे थ्व जातिया मुं लजगा खः धका धाइ । थौंकन्हे थ्व जातिं स्वाँज्या याइपिं नीखा नी न्याखा छेँ जक दइथें च्वं ।  अले आपा सियाँ स्वाँज्या त्वता मेंमेंगु हे लजगा ज्वने धुकुगु खनेदु । स्वाँयागु लजगा ज्वना वया च्वपिं आपायाना मब्वंपिं व पंूजि मदुपिं अले ईया ह्यूपा नापं थःम्ह थइतः हिले मफुपिं जुया च्वन । थौंकन्हे स्वाँज्याया तःधंगु भाग मेपिनिगु ल्हातय् लाःवनेधुुंगुकु खनेदु । छम्ह निम्ह सेंय जक न्हूगु कथं नर्सरी तया स्वाँज्या यायगु कुत याना वयाच्वंगु खनेदु । येंय् व यलःय् च्वंपिं आपाः गथु तय्सं स्वाँया ज्या त्वते धुंकल । नगरय् दुने स्वाँ ज्या यायेत मागु क्यवःत नं तना वंगु जुल ।  न्हूगु कथं स्वाँ ज्या यायेत ज्ञान, शीपया कमि जुगुलिं थौंकन्हे स्वाँया माग यक्व बढे जुसांः मालीपिंसं, दाँ मदुपिं जुगुलि,ं स्वाँया लजगा ज्वना वने मफुतः बरु मे मेगु हे लजगा ज्वना वयाच्वंगु जुल ।
ईया ह्युपाः नापं मालितय्सं परम्परागत स्वाँ ज्या त्वता व्यापार, नोकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि लजगा ज्वना वया च्वंगु खनेदु । तर, गाँगाँमें च्वंपिनिगु मू लजगा धासा बुंज्या हे खः । बुंज्या नापंनापं गांमें च्वंपिंसं व्यापार, नोकरी, सिकःमि, दकःमि, सिंबुता कोरेयाोयगु, धलोतया द्यः दयेकेगु, आदि ज्याः यानावया च्वंगु खनेदु । गांमे च्वपि मिसापिं लाःज्याया रुपं तंय् फेनेगु, गलंैचा थायेगु, स्वीटर थायेगु, कापः थायेगु, सुकु थायेगु, लंः सुइगु, साबुं दयेकेगु आदि ज्या याना वया च्वंगु खनेदु ।
न्हापाः न्हापाः माली जातिया छगु लजगा तान्त्रिक ज्या नं खः धका धाइ । न्हापाः थ्व जातिया दुजंपिंस थगु तान्त्रिक शक्तिं उपचारयाना थी थी ल्वय् लायेका वयाच्वंगु न्यनेदु । थ्व जातिया तान्त्रिक शक्ति झिंनिदय् छक पिदनिगु येंया पचली भैरब प्याखँ, भद्रकाली प्याखँ, किपुयागु बाघ भैरव प्याखँ व थेच्व व ख्वपय् या दच्छि छक पिदनिगु नवदुर्गा प्याखँ न्ह्याका वयाच्वंगुलिं नं खनेदु । 
 
४. तिसाःवसः व नसाःत्वँसा:- 
 
                    माली जातिं थाय् स्वया ईलय् ब्यलय् थी थी कथं नयेगु–त्वँनेगु, पुनेगु व तिइगु याना वया च्वंगु दु । न्हापा न्हापा थ्व जातिया मिसातय् हाकु पतासि सिनेगु, गाचा व थानागा न्येगु चलन दुसा थौं कन्हे गाँ गाँमें जक हाकु पतासी सिंगु खनेदु । आपास्यां लाः नगरय् व गाँमें नं मिसापिंसं साडी, पर्सि, ब्लाउज, लुंगी, गाउन फिइगु याना च्वंगु खनेदु । गन गन गुलिं गुलिं स्यां गाचा व थानागा नं न्येगु या । मिसा मस्तय्सं घांगरा सूरुवा, कुर्ता सूरुवा, अले थौकन्हे वया च्वंगु न्हु न्हुगु पाइन्त, नापं में मेंगु लं तःनं पुनेगु याना वया च्वंगु दु । मिजं तय्सं कमिज सूरुवा, इष्टकोट, ज्वारीकोट, पाइन्ट, न्ह्याकेगु याः । थम्ह थतः हिला येंकुगु कथं जनि चिगु, हाकु पतासि व थानागा न्ययेगु, तपालं फिगु, कमिज सूरुवा, इष्टकोट, ज्वारीकोट फिइगु चलन त्वफिका वना च्वंगु खनेदु । 
 
                  अथेहे इलय् ब्यलय् तिसाः तिइगु व बीगु चलन दु । मचा जंकोबलय् तिसाः तिइकेत मिसा मस्तय्त जूसा न्हापनय् चाःचाः सुइकेगु, ल्हातय लँु चूरी, तुती कली न्ह्याकेगु याइसा मिजं मचायात जूसा ल्हातय् चेन न्ह्याकेगु याइ । ईहि व बाह्रा तैबलय् म्ह्यायमचा यात भम्चा थें समाः याका तिसाः वसः पुंका बाँ लाकी । अथें समाः याकेबलय् थगु गच्छे कथं लुं चूरा, तुतीइ पाउजु, घंगला दय्का बीगु याइ । दाँ मदुपिंसं जुसाः थः माँ पिनिगु वा अजिपिनिगु तिसाँ तिकेगु नं याइ । 
 
                    म्ह्याय्मचा यात तिसा तिइकेगु, ज्वःलाक्क न्हाय्पनय् झुम्का, रिङ्क, टप, मार्चा, तुकी, माकःसि, धुंग्री, आदि सुइकेगु याइ । कक्कुइ  भिम्पु माः, हारमाः, सूराइ, तिलरी, तायो, ल्हातय् अंगु, लुंचुरी न्ह्याकी, तुतीइ पाउजु,  कली न्हयाकेगु याइ, छेंनय् लुस्वाँ, सिरबिन्दु आदि तिइकेगु याइ । तर थौंकन्हे न्हुगु फेसनः याना तुकी, माकसि, धुंग्र्री सुइगु व भिम्पु कोखायगु व तुतीइ कली न्ह्यायगु चलन तना वंगु खनेदु । 
 माली जातिया तीसा वसः बारे खँ ल्हायबले परम्पराया रुपं न्हयाका वया च्वंगु थी थी गँ प्याखँ ल्हुइत पुने मागु तीसा वसःयागु न बयाँ याय मालिइ । गँ प्याखँ ल्हुइबले थी थी द्यःया थी थी वसः व तीसा फिनेपुने माः । द्यःजुइपिंस छ्ेँनय्  फेत्ता क्वपु  नाग ग्व, थी थी रंगया च्वामो , म्हय् पुतु दुगु द्यःलँ, जःनि, क्वखा गा,  थीथी रंग या घा काप, धुछेँगुया लँ अले क्वय म्हय्  ह्याउँगु सुरुवा, थीथी रंगया जामा  व धुछेँगुया जामा सिनेमा । अथेहे तिसा ज्वलंलय् छ्यने किकिंपा, म्हय् कण्ठि, शिकाली माँ, त्वँ, बार्इं, चुल्या, द्यः अंगु, अले तुति घँघला न्हयाये्मा ।
 
नसात्वंसा
 
                   माली जाति पिनिगु न्हि न्हि नयेगु नसाःत्वँसाः धैगु जाः, केँ, तरकारी, अचार हे खः । फुपिंसं व योपिंसं सुथय् बःहनि जाः नइ बलय् थीथी लाः (में खसि, खा, हें, न्याः) नं नयेगु याइ । न्हिनय् थी थी लोसा तया बजि नयेगु याइ । थःथें बजि नइबले बुं ज्या याये मागु गाँमय् थ्वं, अयला नं त्वनी । भ्यय् नयेबले जक बजि, भुति, मंू लाः, तःखला, तुयूसिमि, आलु, पन्चक्वा, चना, केगु, मस्यां वाउँचा, छ्याला, छाेंंक्वाः, पाउँक्वा अले सिसाफुसा धका धौ, चिनि, केगु, लै, तुसि, सन्तरासी, स्याउ आदि तया नयेगु व नकेगु चलन दु । सम्हय् बःजि धका बजि, हाकु मुस्या, पालु छ्वयला, खेँ, भूति, आलु, वाँउचा, वो, न्याः, थ्व,ं अयला, आदि तया नयगु चलन दु। 
थ्व जाति दच्छिया दुने न्हिया न्हि धइ थें वापत्तिंंकं वइगु तःधंगु वा चीधंगु नखःचखः जात्रा आदि हनेगु चलन नंं दु । थ्व नखः चखःबलय् नयेगु नसाः त्वँसाः थी थी नखः चखःबलय् पाइ । फुक्क नखः चखःबलय् छता जक हे नयेगु याइमखु । मोहनी बलय् लाःया परिकार दयेका नयेगु याइसाः, स्वन्तिबलय् फलपूmल व मरिचरि अप्पो नयेगु याइ । सकिमना पुन्हिबलय् सकि, हिचाकु नयेगु याइ । यःमरीपुन्हिबलय् आपा सींया गुथी हना तखलाः, न्याखुना दयेका चाकु खुवा तया यःमरी दयका नइ । मिलापुन्हिबलय् मिःछोयेका लैं छुया नयेगु नं चलन दु । ध्यःचाकु संल्हु बलय् ध्यः, चाकु, तिलरी, हामो ग्वारा, तरुल, पलःयागु अचार, दयेका थी थी लाः यागु भुटुवा दयेका नइ । सिथि नखःबलय् मायवोः, कःसुवो, मूवो व चतांमरि आदि तया भ्वय् नयेगु याइ । गुंपुन्हिवलय गुता बूवः या क्वाति तोना उके छुचुं मरि नं नयेगु याइ । चथाः बलये छुस्या मूस्या कःनिनयेगु याइ । 
 
५. माली जातिया गुथि व द्यो जात्रा:-
 
                    माली जातिपिंसं नं थी थी गुथी दयेका थी थी सामाजिक रितिथिति हना वया च्वंगु दु । थ्व जातिया दुने मे मेगु गुथि स्वया द्यःगुथी अपो दुगु खनेदु । द्यः गुथि नापनापं सी गुथि नं दयेका तःगु खनेदु । अथेहे येँय् च्वंपिं मालीतय्सं तलेजु देगलय् सख्वा पायेगु व कुमारी द्यः सालिबलय् कुमारी, भैरब व गणेश यात स्वाँ तयेगु, वहे गुथिं स्वयम्भु महाचैत्य नं सख्वा पायेगु ज्या हना स्वयम्भु भुईखेलय् देय् भ्वय् नयेगु गुथि दुगु खः । थौकन्हे थुगु गुथिया ज्या दिइ धुंकूगु दु ।  
 
द्यो गुथि:- द्यः प्याखँ ल्हुइकेत, द्यः चलेयातः व द्यःया संरक्षण यायेतः दयेका तःगु गुथि यात द्यःगुथि  धाइ । स्वनिगलय् मालीतय्गु प्यँगु द्यःगुथी न्ह्याका वया च्वंगु खनेदु । थ्व प्यँगु द्यः गुथि येंयया पचली भैरव व लुमधि अजिमाः, थेच्व व ख्वपय् नवदुर्गा व किपुया बाघ भैरवया गँ प्याखँ  न्ह्याका च्वंगु दु । 
येँया पचली भैरब व लुमधि अजिमा  १२ बर्षे जात्रा गुथि
येँय झिँनिदँय छक दच्छि यंक पचलि भैरब व लुमधि अजिमा यागु १२ झिँनिदँया जात्रा न्हयाकेगु ज्या गुथिया मूल गुरु पृथिबि नारायण मालाकारया ग्वसालय् तधंगु व चिधंगु सी गुथि या  खलः पिंसं याना वया च्वंगु दु । थ्व गुथिया थकाली कान्छा मालाकार ख । थुगु गँ प्याखँ न्हयाकेत ६ म्ह गुरुया ग्वसा ग्वया तगु खनेदु । गुरु पिंसं थथगु बाजा थाना, पुया गँ प्याखँ ल्हुइकेगु ज्या याकेगु याइ ।
१. खिँ बुजा, २. ताः बुजा, ३. बबु बुजा कान्छा मालाकार , ४. छुस्या बुजा,  ५. च्वयम्ह पोँग बुजा,
६. क्वयम्ह पोँग बुजा ।       
     
अथेहे प्याखँ सुथाँलाक्क ल्हुइका यंकेत मामागु ज्याखँ याय निंति स्वम्ह प्याखँ नायः त ल्यया तगु खने दु बिसं २०६० सालय झिँनिदँया जात्राया नायःपिं क्वय च्वया कथं दु :-
१. घोम्पोमी नायः बेखा रत्न माली (थाँयथासे प्याखँ ल्हुइकेत मागु ग्वसा ग्वयगु ज्या यायेगु),
२) दाती पोमी नायः मन मालाकार (प्याखँ ल्हुइकेत मागु ज्वलं न्यागु ज्या याना उकीयागु ल्या तयेगु) ,
 ३) मिम्पोमी नायः प्रेम मालाकार  (प्याखँ ल्हुइकेगु थासे ईलाँ खायगु, द्यः तयेगु, थाँय छिन्केगु) ।
 
कंग कजिमाःया गँ प्याखँ 
                न्हपाः न्हापा येंया खड्ग सिद्धि गुथि कंग कजिमाः (थौकन्हे नेपाली भाषा कंकेश्वरी धाइगु) या नं झिंनिदय् छक द्यःप्याखँ ल्हुइगु जात्रा याना तगु खः । न्यनेकथं कंग कजिमाया प्याखँ जुगुबलय् प्याखँ न्ह्याका वयाच्वपिं द्यःपिंनि न्ह्योने गिजे यागुलि छम्ह प्याखँ स्वमि यागु बलि कागु जुल । अनलि अथे द्यःपाखँ प्याहाँ वइबलय् नर बलि बिइमालिगु जुवंगुलि उगु प्याखँया जात्रा हे दिकेगु ज्या जुल ।  
 
किपुया बाघ भैरब गुथि
               बाघ भैरब गुथि थौकन्हे ८० दुजः दु । थ्व गुथिं झिँनिदँय् छक बाघ भैरब गँ प्याखँ या लायकु गुथि न्ह्याका वया च्वंगु दु । थ्वहे गुथिं सी गुथिया ज्या न याना वया च्वंगु दु । थ्व गुथि नाप स्वापु तया गुथि पाखें परे जुइगु बलय् सीमहय् सीगु मागु उइगुपुइगु ज्या याका च्वंपिं ३६ खलःदरु दु । थ्व ३६ खलः मध्य मच्छेगामें १३, नैकाप तीनथानाय् १३, किपुलिं ४, नंगामें ३ व येँ कलंकी ३ दु । 
बाघ भैरब गुथिया दुजःपिंसं जक द्यः जुया प्याखँनय् ब्वति काय् दइ । दरु जुया च्वंपिंसं  ब्वति कायेत गुथि दुजः जुइमा । थिंल्लाथ्व १० कुन्हु सुथय् गुथि पाला न पिगमे बलिपूजा यँकेमा । उगु पूजा मयँतक इन्द्रायणी जात्रा न्ह्याकी मखु । उकुन्ह गुथि पाः ब्योँम्ह पाला नं च्याम्ह थकाली पिंत भ्वय् नके मा । थ्व भ्वय् नकेबलय्  पिगंमय इद्रायण्ी जात्रा कुन्हु बिइगु ह्यँ बां सी च्याम्ह थकाली पिंत विइगु याइ । बां यागु ल्यंगु प्रसाद कथं में में पिन्त नं इनेगु याइ ।  थ्व गुथिया दुजंपिं थी थी थासय्् च्वना च्वंगुलिं सी उइगु नं थाय थासय् हे यायगु याना तःगु दु । किपुया दुजंपिन्त दीखुई, नगांमिपिंन्त भाजं गाया दिपय्, भाजंगालय् च्वंपिन्त सिल्खुचा ( सुन्धरी घाट ), तिथाना च्वंपिन्त बखुइ, मच्छेगामेय च्वपिंन्त निन्यादँ न्हयोतक तपख्योचाय्, थौकन्हे बखुई हे हयगु याइ । येँय् ठमेल च्वंपिंन्त लुतिई अले कलंकि च्वंपिन्त बखुई सी उइगु ज्या याइ ।  
 
येँया सीः गुथि:-
              मनू सीना वनिगु बखतय् सामाजिथक विधि ब्यबहारकथं सीम्हःयात चलेजुगु कथं सना मुंका, सीथं येंका सतगति बिइतः मागु ग्वाहाली कायेत द्येकातःगु गुथि यातः हे सीगुथि धाइ । येँय मालीतय्गु स्वंगु सीःगुथि व छगु जक द्यः गुथि दु । थ्व स्वंगु गुथि मध्ये तःधंगु द्यःगुथि खः । थ्वहे द्यः गुथि लुमधि व पचली भैरवया खड्ग सिद्धि झिंनिदय छक ल्हुइकेगु गँ प्याखँ चलेयाना वयाच्वंगु खनेदु । सीःगुथि दुज जुया सीःउया जुइ मफुपिं थःगु छेंय् मनू मदैगु बलय् सीम्ह मनूयातः सतगति बिइगु ज्या गुथि पाखें याकेत येँय् तुइगा धका गुथिया मुज्याँ क्वछ्युगु कथं दाँ तयेगु चलन दु । न्हापा न्हापाँ गुथि पाःलाम्ह गुथियारं गुथिया जंपिनिगु छें छें वना थिला पुन्हिबलय् थ्वंकी कायगु चलन यानातगु खः । थौकन्हे थ्वंकीं पलसाः छक्वलं निन्यासः दाँ कायगु चलन जुल । येँया तधंगु थ्व गुथिया थकाली  कान्छा मालाकार ( मरुबहि ) ख । थ्व गुथि थौँकन्हे न्हय्म्ह दुजः दु । अले तुइगा तया च्वंपिं ४६ खलः दु । थ्व गुथि दच्छि निक भ्वय् नयगु याइ । यःमह्रि पुन्हि बलय् निन्हु यंक भ्वय जुइ । सिरिपंचमी कुन्हु न भ्वय् नयगु याइ ।
येँया मेगु सीगुथि चिधँगु गुथि ख । थुगु गुथिया थकाली ईन्द्र मालाकार ख । थुगु गुथि थौँकन्हे १२ म्ह दुजः दु । थुगु गुथि तुइकगा तया दुहाँ वना च्वंपिं ६० म्ह ति दु । थ्व गुथि या द्यः पचलि भैल द्यः ख । थ्व गुथि दँय् स्वक भ्वय् नयगु याइ । गुथिया मू भ्वय् थिंल्ला पुन्हि कुन्हु जुइ । उ कुन्हु छन्हु न्हयो छोयला भू, पुन्हि कुन्हु मू भ्वय् अले कन्हे कुन्हु गुथि पाला हिलिगु जुया द्यः पित यंकेगु व द्यः दुत यंकेगु कथं नापं स्वनु यंक भ्वय् नयगु याइ । मेमेगु भ्वय् सिरिपंचमि कुन्हु ससु पुजा धका व दिल्लाचःह्रे बलय् क्षमा पुजा याना  नं भ्वय् नयगु याइ ।                                              
येँया स्वंगुगु सी गुथियात नं पचलि भैरब गुथि नाँ छुना तगु दु । येँया निगु गुथि दुहाँ वने मखंपिं थुगुलि दुहां वना च्वंगु खने दु । थुगु गुुथि ८म्ह दुजः त दु । थुगु गुथिया थकाली थौकन्हे कृष्ण माली ख । थ्व गुथि दँय् छक थिंल्ला पुन्हि कुन्हु छन्हु जक भ्वय् नयगु याइ ।
 
थेच्वःया द्यः गुथिः
                थेच्व द्यः गुथीं दँय् निकः प्याहाँ वइगु नवदुर्गा द्यःया संरक्षण याना द्यःप्याखँ ल्हुइका वया च्वंगु दु । थ्व गुथी दँय् न्याक नवदुर्गा द्यःया पूजा नं याइ । थ्व पूजा थुगु कथं दु – बछलाथ्व तृतीया  कुन्हु अजुँ स्वाँ छायगु, दिल्लागा त्रयोदशीया कुन्हु चस्वाँ छायेगु, गुंलागा त्रयोदशीया कुन्हु कमल स्वाँ छायगु, मोहनी व योमरी पुन्हि बलय् द्यःपूजा याना द्यः प्याँ ल्हुइकेगु व बांः बिइगु आदि ज्या याना वया च्वगु खः । थ्व गुथिइ द्यःजुपि झिछंम्ह, द्यः ज्वनिपिं झिंछम्ह, नायः स्वम्ह, बाजं थाइ्रपिं प्यम्ह, पूजा याइम्ह छम्ह, पोहमि छम्ह, मुस्या ज्वनिपिं निम्ह, गुगुंमकःचा ज्वनीम्ह छम्ह अले भाःकथि ज्वनिम्ह छम्ह याना ३४ म्ह दुजपिं दु । थेच्वय् द्यः गुथिया भ्वय् बलय् झोलीक्क न्हापालाक्क द्यःबुइम्ह, अनलिं नोकु दबःखिं, अले स्वकुु मूताड, प्यकु क्यँय्था, न्याकु कच्चाताड, भैलःद्यः, दक्षिणकाली, बाराही, कुमारी, गणेद्य, म्हासुख्वाद्यः, तुयुख्वाद्यः, महालक्ष्मी, सिम्बाद्यः, धुम्बाद्यः च्वनिगु याइ । थुगु द्यःगुथि त्वतिपिनिगु थासे मनदुपिंत पलिस्था यायेगु याइ । 
थुगु गुथि दँय् छक थिंल्ला पुन्हि कुन्हु छन्हू न्हयो ब्रम्हायणी द्यःःयात पिगंमे यंका छोयला भू याइ, कन्हे थेच्वय् छगू सी गुथि नं दु । थौंकन्हे अनया सी गुथी १३० गुथियार व ८० दोजतः खनेदु । दच्छिया छक द्यः जात्रा याना हया द्यःलाछी प्याखँ ल्हुइकेगु याना मूं भ्वय् नयेगु याइ । गुथियारं १०० तका अले दोज तयसं ५० तका सिं न्यायेया निंति ल्हापं तयेगु याइ । गुथिया ज्याय् ग्वाहालि यायेत अबुपिं नापं दुहां वया च्वंपिंनित दोज धाइ । सुनं मनु सीत धासा खुसी गुथीया सकलें वनेगु याइ । यदि गुथीयारयातः छुं जुया वने मलातः धसा गुथीयारया पल्सा गुथि व्दाहा वयाच्वंपि दोजतः वा थः काय्पिं पसा छोयगु याइ । अथेँ पल्सा छोय बलय् गुथिया दोज जुया च्वंपि जक छोगु याइ । थौंकन्हे उगु सी गुथिया थकाली बेखा लाल ख । थुगु गुथिया ज्याखँ तालाक्क न्ह्याकेत प्यम्हं नाय (माझः) तय्ग व्यवस्था यानातःगु दु 
 
ख्वपया द्यः गुथि 
                  ख्वपय् द्यःगुथिं नवदुर्गा गँ प्याखँ दँय्दँसं ल्हुइका वयाच्वंगु दु । थ्वगुथि थ्योंमथ्यों ११० दुजःदु – ख्वप ८० म्ह, ताथली १६ म्ह, नँखेल ९ म्ह,  सक्व ९ म्ह , भोंत २ म्ह , पन्ति २ म्ह ।  थुगु गुथि ८ म्ह नायः त दु । दँय्दँसं द्यः प्याखँया जात्रा न्ह्याकेत च्याम्ह नायः पिंसं मामागु ज्या अह्रेपह्रे यायगु याइ । 
द्यःछेँ या ल्या बंशावलि सफु ब्वना कोछिगु याइ । प्यखलः पाला तयके प्यंगु सफु दु । सफु जिम्मा कया तपिं ख ः १. बिकुलाल,   २. राजकुमार,  ३. ईन्द्रबहादुर,  ४. सन्तकुमार । द्यःछेँ पाः कोछिइ बलय् उगु ज्या याना वया च्वंम्ह जोशंीं (थौ कन्हे पद्म नाथ जोशी) द्यःछेँ पा कोछित ग्वाहालि यायेगु याइ ।
 
सी गुथि :- ख्वपय् प्यंगु सी गुथि दु । सी गुथिया दुजःपिंत हाकु गाँ अले गुथि दुजः मजुसे दुहाँ वना च्वंपिंत तुयु गाँ धायेगु याना तगु दु । सी गुथि या नाँ क्वय् च्वया कथं दु ः
१ क्वाथंडो  ...  हाकु गाँ ... ७ खलः तुयु गाँ मदु,
२. खोंरे (खँ चा) ... हाकु गाँ ... ५ खलः, तुयु गाँ ...१२ खलः,
३. नचा ... हाकु गाँ ... ६ तुयु गाँ ४५ ... खलः,
४. शरण ... हाकु गाँ ... ४ खलः, तुयु गाँ ... १० खलः ।
खोंरे गुथिया पिंसं ल्हुति पुन्हि व सिरिपंचमी बलय् न भ्वय् नइ । अथेहे नचा गुथिया पिंसं गुँपुन्हि व यःमह्रि पुन्हि बलय भ्वय् नयेगु याइ । पाहाँचहे्र कुन्हु हाकु गाँ पिंसं तुयु गाँ पिंत घासा भ्वय् सःति अले तुयुगाँ पिं बजि ज्वना भ्वय् नः वनेगु याइ । शरण सी गुथि न्हुगु गुथि खः । थुगु निस्वंगु १८ दँ दत । अथे नवदुर्गा गुथिया ताथली यापिं बनमाला तय्गु मेगु सी गुथि दयेका तगु दु ।
बुँगय् माली तय्गु निगू सी गुथि दु । तधंगु गुथि ३५म्ह अले चिधंगुलि २१ म्ह दुजः दु । बुँगय् गुथिया मू भ्वय्  थिंलागा १० कुन्हु दिशिपुजा याना मालखो दिशि भ्वय् धका नयगु याइ । 
 
दँसी ( धापाख्यः ) :- न माली तय्गु निगु सी गुथि दु । वारि च्वंगु गुथि ४६ म्ह अले पारि च्वंगुलि २० म्ह दुजः दु । थनया गुथिइ यःमरि पुन्हि व सिरिपंचमी बलय् भ्व जुइ ।  
 
धर्म व सँस्कृति
 
                     थ्व जाति बौद्ध धर्मावलम्वी खः । थ्व जातिया दुजपिं बौद्ध धर्मालम्बी जुया बौद्ध विहार वनेगु, भन्ते व अनागरिका जुइगु, बौद्ध पूजा यायेगु, गुंला लछि स्वयम्भू वनेगु याइ । माली जाति बौद्ध धर्माबलम्वी खः सांः थ्व जातिया मनुपिंसं हिन्दू धर्मया थीथी पुजा नं याना वगु खनेदु । थ्व जातयागु फुकं कर्मकाण्ड बज्राचार्य गुरुजु पाखँे जुया वयाच्वंगु दु । तर ख्वपय् नवदुर्गा द्यःप्याखँ सम्बन्धि ज्या भ्mवलय मागु पुजादी द्यः–बर्मु पाखेँ जुयाच्वंगु दु । अथेहे सत्यनारायण पूजा, सम्ताह, रुद्री यायगु, एकादशीया ब्रत च्वनिगु आदि हिन्दू धर्मालम्बी पिन्स याइगु ज्या नं याना वगु खनेदु । अथेहे गुलिं गुलिं विचलन जुया में में गु धर्म पाखें नं लगे जुगु खनेदु । 
 
संस्कृति 
                      येँय प्रचली भैरव प्याखँ भिंmनिदंय् छक मोहनीया पाया कुन्हु जुजु नापं खड्ग सिद्धि याना उखुन्हु निसें दँच्छियंक थाय् थासय् ल्हुइकेगु याइ । अथे हे झिंनिदय छक श्री लुमधि (भद«काली) अजिमा या द्यः प्याखँ नं राज गुथिया रुपय् जुजु नाप खड्ग सिद्धि याना थाय् थासय् द्यः प्याखँ ल्हुइकेगु याना च्वंगु दु । थ्व प्याखँयातः मागु खर्च राजगुथिया रुपं सरकारया धुकुंितं विइगु याना तःगु दु । थेच्व व ख्वप या नवदुर्गा प्याखँ दँ दँ ल्हुकेमागु प्याखँ खः । थ्व प्याखँनय ब्वति काईपिं मालीत खः । ख्वपया नवदुर्गा प्याखँयात वसः, ख्वापा, पूजायातः मागु खर्च गुठी संस्थानपाखेँ भतिचा दाँ ग्वाहालि जुया च्वगु खनेदु । तर द्यः जुया दछियंक ब्वति काइपिन्स नासःद्यः पुजा याना थःथितिपिन्त भ्वय् मनकसें मगा । अन्यागु भ्वय खर्च म्हतिं नीद्धो (२००००) निसें स्वीद्धो (३००००) तक जुइगु खनेदु । अथें जुया ख्वपय् मालीतय्त द्यः प्याखँनय् ब्वति कायेत तसकं हे थाकुया च्वंगु दु । 
थेच्वय्या नवदुर्गा प्याखँ यात न्ह्याकेतः थ्व हे द्यः गुथिया भति भति जग्गा वगु दाँ व अन्न न्ह्याका वयाच्वंगु दु । थ्व द्यः गुिथ यात  गुठी संस्थान व सरकारं ग्वाहालि याना च्वंगु खनेमदु । अथेंजुया थेच्वया गँ प्याखँयातः परम्परा निसें म्वाका तयतः अनच्वपिं माली दुज पिंस तःधंगु मूल्य चुके याना च्वंगु खनेदु ।  अथेहे ख्वपया गँ प्याखँ न्ह्याकेत नं ख्वपयापिं बनमाला दुजःपिंसं दँय्दँसं यक्व दाँ द्याना च्वंगु दु । यदि सरकार व समाज पाखेँ माक्व ग्वाहालीं विइगु ज्या मजुल धासा उगु गँप्याखँ कालान्तरय् तना वनेफु । 
 
                    गथुतय्गु थी थी धर्मया ज्या, पूजा, नखः चखः, भ्वय्बलय् थी थी बाजं थायेगु याइ । धिमें, धाः, बासुरी, खिँ, आदि बाजं  धर्म व लसताया ज्याय् थायेगु याइ । अथें जुया थ्व बाजं यात द्यः बाजं धका नं धाइ । काँ यात द्यः बाजं व सी बाजंया रुपं नं पुया वयाच्वंगु खनेदु । बौखेँ बाजं चःरे व आमाइ बले जक थाइगु बाजं खः । थ्व बाजं धर्म, पूजा, भ्वय व सी बलय् थाइ मखु । थ्व छगु थ्व बाजंया विशेषता खः । यदि छुं नं बाजंया कजि वा गुरु सित धासा व बाजं थाना सीथं यंकेगु चलन दु । गथु जातं गां गांमें थौं तकन थ्व फुक्क बाजं त थाना वया च्वंगु दु । किपूलि माली जातिं द्यःकाँ पुइगु या ।
 
श्री लुमधि भद्रकाली व पचली भैरवयागु झिँनिदया खड्ग सिद्धि जात्रा :-
 
                       स्वनिगलय् न्यनेदुगु छगु ऐेतहासिक बाखं कथं इतिहासया छगू कालखण्ड्य श्री महालक्ष्मीं भवानीँ जुजु गुणकामदेव (११८४—११८७ ए. डि.) यात म्हंग्सय वया खड्ग आकारया नगर द्येका कान्तिपुर धका नां छुइत आज्ञा जुल । वहे आज्ञा कथं जुजु गुणकामदेवं खड्ग आकारयागु कान्तिपुर नगर दयेका थ्व नगरया रक्षाया निंम्ति श्री लुमधि भदकाली व पचली भैरव नापं खड्ग हिलिगु झिंनिदँय् छक खड्ग सिद्धि जात्रा न्हयाकुगु धका धया तःगु दु । थःथे खड्ग सिद्धि याना झिँनिदँ तकं निस्कण्टक रुपं राज्य यायेत शक्ति दैगु धार्मिक विश्वास खनेदु । तर जुजु गुणकामदेवया इलय् पचली भैरबया प्याखँ न्ह्याकातःगु दसु आतकं लुइके मफुनी । अथेहे लुमँधि अजिमाया गँ प्याखँ लिपा जक न्ह्याकुगु खः धका धाइ । 
 
                     मालीतयसं श्री लुमधि भद्रकाली व पचली भैरब यागु राजगुथि कथं नेपा याम्ह जुजु नाप खड्ग हिलिगु जात्रा न्हयाका जुजु नापं स्वापु दया च्वंगु बारे छगू पुलाँखँ न्यने दु । गथेकी थौंकन्हे मालीतय्सं न्ह्याका वया च्वंगु गँ प्याखँ यक्व न्हापा नेपाया जुजु खलः पिंसंहे ल्हुया तगु धका धाइ । छन्हु लाय्कुलि स्वाँ तःवम्ह गथुनी नं लानीं ख्वाः खिउँक तया च्वंगु खना लानी याके उकिया हुनि न्यंगु जुल । महारानी नं थयात पीर जुया च्वंगु खँ कनेगु भ्mवलय् लायकुया अगम द्यः जुजु पिंसं पुज्याय्बलय् मनू बलि विइमागु जुया च्वन, तर वः द्यःयात मेपिंसं पुजा यासा भ्याय् छम्ह जक बाँ बिउसा गाः । अथें जुया थ्व द्यःयात गथुनीया छेँय यका पुजा याये यःला धका न्यंन । थ्वः द्यः यंम्हसीत द्यःया पुजा यायेत मागु हलंज्वलं तःनं लायकु नं हे बियेगु, वः द्यःया ज्या न्हयाकेत बुँ नं बिइगु धया दिल । लानीया खँ न्यना वः गथुनीयात द्यःयंके मास्य वल । अथे जुसां छें मिजं याके न्यना लिसः बिइ धका ल्याँहा वल । छें वना लानीं धागु फुक्व खँ मिजंयात कं बलय् मिजंम्ह नं द्यः पुजा यायगु ज्या ला खःनि धका द्यः कया हयत उजं बिल अले थ्व द्यःयागु पुजा यायेगु ज्या नं थुइका वयेत  स्यना छ्वल । कन्हे कुन्हु सुथ न्हापा न्हयाबलय् थें स्वाँ ज्वना गथुनी लाय्कुलि वना लानी यात मिजं नं उज्ाँ बिउगु खँ कँ हयेगु बलय् लानी तचक्वं लयेताल । थ्व द्यः नापं थ्व द्यःयागु फुकं हलंज्वलं बिया हल तर धाथेंगु खड्ग लाय्कुलि हे थाका उकिया पलसाय् उत्थें च्वंगु मेगु खड्ग बिया हल । छाय्धाःसा थ्व द्यः लायकु नापं स्वापु दु धैगु चिंया रुपं लायकुत्लि हे तयेगु यातः । उकें थ्व द्यः लाय्कु नापं स्वापु दु धका झिँनिदँय् छक धात्थेंगु जुजुया खड्ग नाप पचली भैरव द्यःनं  खड्ग सिद्धि यायेगु याना थ्व अगम द्यः बिया हगु खः धका धाइ । खडगसिद्धि याइबलय् स्वक तक द्यःया खडग नाप हिला स्वक लिपा जुजुं थगु धात्थेंगु खड्ग थम्हेस्याँतुं लाय्कुलि हे ज्वना वनेगु चलन दु । 
 
                     झिनिदँया जात्रा जुइगु दँय् थ्व प्याखँया म्ूंगूरु व मंूनायः नापं झिनिदँया जात्राया गुथि खलःया मा मा पिंसं कामिका एकादशी कुन्हु शुभसाइत स्वया श्री ५ महाराजाधिराज सरकारया जुनाफय् ग्वय दाँ तयेगु ज्या जुइ । थ्व ग्वय दाँ ज्याझ्व मोहनीया बःन्हि श्री लुमधि अजिमायागु गँ प्याखँ बलय् मखं तारिणी बहाया सिँह दुबातय् जुजुं  लुमँधि अजिमा नापं खड्ग सिद्धि याना बिज्यायेत, श्री पचली भैरब यागु गँ प्याखँ बलय् मरु गणेद्यःया न्हयोने भुतिसःलय् पचलि भैल द्यः नापं खड्ग  सिध्दिया निंति व हनुमान ढोकाया नासः चुकय् पंचवली पुजाया प्रसाद कया बिज्यायेत ब्वना–पौया रुपय् ग्वय झिगः, भद्रकाली व पचली भैरबया चिं दुगु वःया दाँ न्यागु, पसुकाः नापं बिइ यंकेगु न्हापा निसेंया परम्परा आःतक ल्यना च्वंगु हे दनी । 
 
                 झिँनिदँया प्याखँ पूजा धार्मिक परम्पराया रुपं सुथांलाक्क न्हयाकेतः सरकार याके उज्वं कया  पिगंमय् बाँ स्याना, पूजा याना मू गुरु पाखें दक्वं द्यःजुपिन्त पलिस्था याइगु ज्या जुइ । थ्व हे दिं निसे दक्को द्यः पिन्त थतःलागु पद कथं गुरु, मू नायः, कचा नायः पिंसं नीसी जुया दच्छितक थगु नित्यकर्मय् च्वना धार्मिक परम्पराया रुपं याय मागु फुक्क ज्या कना दिइ । गथांमुगःया दिं निसें दक्व द्यः जुइपिंसं सँ खाना, थीथी खुसि वना मोल्हुया, नीलः हया कलःपूजा ज्वना लंय् सुना नं मथिक्क, अले सुइतं नं न्वमवासे  लुमधी अजिमाया बलय् वटु त्वाया आगं छेँ , अले पचली भैलद्यःया प्याखँ बलय् ज्याः बहि त्वाया                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          आगँ छेँ पायछि इलय् थेंके माः । आगं छेँ दक्व द्यःपिं नापं न्याम्ह थकाली नकीं  वया दक्व सित  थः थःगु कोतः पूजा याइ । वहे दिं कुन्हु भ्वय नयतः ज्वरेयाना सन्हि कालय् दक्व द्यः पिंन्स थःथःगु कलः पूजा रुमालं टोपुया द्यः पिं फुकं छसी कथं कलपूजा सामान थः थःगु ल्हातय् ज्वना भद्रकाली व पचली भैरब पीगंमय् वनी । पीगंमय् थेने धुंका दक्को द्यः पिंन्सं थःथःगु थासय् च्वना द्यः साधना याना पूजा याइ । थ्व पूजाया दक्को  हलंज्वलं रुमालय् प्वचिना द्यःयात साधना याना हानं द्यःः दक्व छसी कथं  पीगंमं आगं छेँ हे ल्याहा वइ । 
 
                 पिगंनय् साधना याना पो चिना हगु पूजा सामान प्वः नापं आगं छेँ खायेत तया तगु सिंःया नकीलय्ं दक्वस्यां खायेगु याइ । वहे दिं कुन्हु चान्हे नासःद्यः पलिस्था याना दक्को द्यःपिन्त पंन्चबली बिया झ्ँिनिदँया गँ प्याखँ ल्हुइकेगु ज्या स्यनेगु याइ । गथाँमुगः चह्रे निसें पन्ध्राँचह्रे छन्हु न्हयो तक घासापा पूजा याइ । थ्व दिंसं दक्व द्यः पिन्त पंचवली पूजा बिइगु याइ । बलि पूजा याना द्यःपिनि गँछिंक्ं च्वना दच्छि यात गाक्क प्रसादया रुपं बिइगु  पसुका दयेकेगु ज्या जुइ । 
 
                     नवरात्रीया सम्तमी खुन्हु मध्यान्ह चान्हेय् काली, भैरव, बाराही, गणेश, कुमारी नापं शंखमुल, कालमोचन, टेकु दोभान, सोभा भगवती, लखतिर्थ दोभानय् वना म्वःल्हुया सितुतिया तःगु दाफ्व स्वाँ नापं १०८ स्वाँया लखं जागु घः चान्हे आगं छेँय हइ । महाअष्टमी  बःहनि पूजा याना पंचबली बिइ । थ्व हे दिं कुन्हु गुरु पाखें वंशावली व मान्साहुटी होम पूर्णआहुती याना विशेष कथं पूजा याइ । थ्व दिंसं चित्रकारपिंस द्येका तःगु ख्वापाः पीगंनय यँका थःथःगु थासय् तया जागरण पूजा याइ । थ्व हे दिंसं मूं गुरुपिंस मन्त्र दान बिइगु ज्या नं जुइ । मोहनीया चाःलं कुन्हु बहनी दक्को पूजा याना होम सिध्यय् धुंका ख्वापाः उलेगु ज्या याना भक्तजनपिन्त तापाकं दर्शन बिकेगु ज्या जुइ । कन्हे दशमी कुन्हु न्हिनय् द्यः पिन्सं थःथःगु लं, तिसा हया ख्वापायात बालाकेगु ज्या जुइ । अले बःहनि साँस्कृतिक बाजागाजा नापं न्याम्ह थकाली नकी पिंन्सं शुभमालाया शुभ कलशया लंखं पूर्णआहुति याना धार्मिक परम्परा कथं भद्रकाली पीगंनय् मखं तारीणीबहालया सिंह दुबाः पाखे भद्रकाली नापं द्यःपिं न्ह्याकी ।  बःहनि शुभसाइत स्वया जुजु मखं तारिणी बाहालय् सवारी जुइ । शुभ मंगल ध्वनिया दथुइ गुरुया आज्ञा कथं जुजु नापं भद्रकालीं स्वक तक खड्ग हिला झिंँनिदँ तकं निस्कंटक राज्य जुइमा धका सुवा बिइगु ज्या जुइ । कन्हे खुन्हु  द्य्ःपिंत बाजागाजा थाना देय् चाःल्हुइकेगुु ज्या जुइ । त्रियोदशी वा कति पुन्हिया दिंनय् वटु त्वालय् आगँ छेँ न्ह्योने बःहनि व न्हिन्हे याना निक्व पंचवली पूजा याइ । अनं लिपाः झिँनिदँया प्याखँ शूरु याइ । थ्व खड्ग सिद्धि जात्रा झिँनिदँय् छन्हु जक यानावया च्व्ंगु प्याखँ यात जुजु अमर मल्लं  दच्छि तकं थी थी पिगंमय् व देगलय्  ल्हुइकेगु चलन न्ह्याकुगु खः धका धाइ । 
                      दच्छिया दुने येँय्या मल्ल जुजुया पुर्खौली आगं छेँ दुगु येंय्या भिन्द्यःत्वा, थकु जुजुया नःनि व  वटु दौवहालय् धार्मिक परम्परा कथ ंखड्न सिद्धि जात्रा जुइ । अथें हे वटुत्वा, महाबोैद्ध, मखं वंघः, असँ, क्षेत्रपाटी, टेवहा, जनवहाया लयता दबु,  तधंचोक, विच्छेवहा, ठमेल भगवती वहा, नकसाल प्यंग थां, हाडीगाँ, टोखा, साङला, चपली ्र नली, तुप्या, गोकर्ण, सँको, चागुनारायण, इन्द्रायणी, यलःलायकु,  ख्वपलायकु, येंय्या लायकु नासः चुकय् , वटु आगंछेँ न्ह्योने आदि थासय् श्रीलुमँधि अजिमा व श्री पचलि भैरबया खड्ग सिद्धि जात्रा यागु गँ प्याखँ ल्हुइकेगु याइ । 
मोहनी बलय् जुजु नापं खड्ग हिला सुरु जुइगु थ्व जात्रा तछलागा  भलभल अष्टमी कुन्हु द्यः लिकाइगु ज्या नापं प्याखँ क्वचाइ । उगु दिँ कुन्हु जमः बाहालय् लिप्याखँ ल्हुयेके धुंका जात्रा कोचायकी कथं सी जाः ह्वलेगु याइ, (सिजा नकेगु न धाइ) द्यः पिंनिगु देत्व पतन याइ , अनलि ख्वापा त्वता  अथें सीःपिं द्यः पिंन्त सीबाजं थाना सीथं वनेथे ख्वापा ल्हातय् ज्वँका लुमधि अजिमाया पिगँमय् यंका विधि कथं  ताञ्त्रिक पुजा याना  द्यः तयगु ख्वापाः त्वका पिगंमय् माःमाःगु थासय् तया द्यः जुपिं मनुपिंन्त नींलः त्वंका न्ह्यलं  बिया तगु द्यःःपिनिगु न्यास लित कायगु ज्या याइ । पिगँमय् याय मागु विधि सिधयका बाजा थाना द्यःजुपिं मनुपिंन्स थःथःगु ख्वापा  ल्हा ल्हातय् ज्वना सीथँ यंकेगु याइ । थथे सीिथँ यााकेगु ज्या  पिगँम तिंख्यया दथुं (थौंकन्हे सैनिक मू ज्याकुथि दुगु थासँ) चीधँगु तिँख्यलय् जुका थौंकन्हे पञ्चकुटी गल्ली धाइगु लँपु जुया कालमोचन दोभानय् यँका ख्वापा  (दाह सँस्कार) उइगु ज्या  याना झिँनिदया खड्ग सिद्धि जात्रा कोचाकेगु ज्या जुइ । उकेया प्यन्हु कुन्हु पिगंमय् प्यन्हु बिचा पूजा याना दच्छिन्ह्यो द्यः पिन्तः बियातःगु पद लित कायगु ज्या जुइ । द्यः पिन्त दच्छितक द्यः यागु नित्य कर्मय् च्वंना देय् व लोक कल्याण जुइगु ज्या यागुलिं  सुभाय देछाना  झिँनिदँया थ्व प्याखँ कोचायकी । थःथे हे पचली भैलद्यःया झिनिदँया गँ प्याखँ जात्राय् नं पाखँ स्यनेगु, पिकायेगु, खड्ग सिद्धि यायेगु, थाय थासय् प्याखँ ल्हुइकेगु, सीजा नकेगु आदि ज्याझ्व नं जुइ । येंया माली तयसं थ्व निगु प्याखँ अविछिन्न कथं याना वयाच्वंगु दु । थ्वगु प्याखँ पाखें झिगु नेपाःया संस्कृति गुलि सम्पन धइगु खँ यचुका ब्यू । आपाःलं विदेशी विद्वानपिं थुगु प्याखँया अन्वेषन यायत मन तया च्वंसाँ परम्परागत कारणं याना इमित सुचं विइ मज्युगु पुलांगु चलन थौंतक नं न्हयाना वयाच्वंगु खनेदु ।  
 
बाघ भैरव झिँनिदँया जात्रा  
     
                        झिँनिदँय् छक प्याहाँ वइगु किपुया बाघ भैरव प्याखँ माली समुदाय्या बाघ भैरव गुथीं न्हयाका वया च्वंगु खः । थ्व प्याखँ  किपुया साँस्कृतिक व धार्मिक खेलय् तसकं महत्व दु । थ्व प्याखँ यात गथु प्याखँ धका नं धाइ ।  मध्यकाल निसें किपु नगर दयेका लोकया रक्षाया निंतिं तान्त्रिक विधि कथं ख्वापालय् द्यः साला, वहे ख्वापाः पुया नगरया थी थी थासय् प्याखँ ल्हुइकेगु व देंय चाल्हुइकेगु यानातगु दु । थ्व नगर जुजु शिवदेवया कालय् दयेकुगु खनेदु । थ्व प्याखँ ल्हुइकेत मागु फुकं खर्च सरकारया पाखें जुगु खने दु । थ्व प्याखँ खर्च कायतः दकले न्हापाः नारायणहिटि राजदरवारय निवेदन तयेमा राजदरवाय् मागु उज्व पौ ज्वना श्री ५ सरकारया तोषाखाना कार्यालय नं निकाशा कायगु खः । थ्व जात्राय झिँस्वंगु ख्वापाः दु । थ्व ख्वापा मध्ये झिँनिगुः द्यःजुइपिं गुथियारपिन्सं ख्वापा, पुइ अले चिधंगु छगु महाद्यःया ख्वापाः कथिइ तिइ । थ्व द्यः यात कथितिया महा द्यः धाइ । थ्व प्याखँ चले यायतःन्याम्ह गुरुपिंन्स बाजं थाइपि अले में में पिं याना फुकं याना ४५ म्ह दु । थ्व प्याखँ ल्हुइपि द्यः त थुगु कथ दु । बाघ भैरव, काली, बाराही, ब्रम्हायणी, कुमारी, गंगा, बैस्णवी, इन्दा्रयणी, व्याघ्रिणी, सिंहिणी, गणेश, सेतो भैरव, कंठितिया महा द्यः खः ।
 
                              थ्व प्याखँ गथांमुगः कुन्हु नास द्यः यातः तान्त्रिक विधि कथं गोंग बां बिया भ्याचायात मूं हायका वैष्णवी द्यःजुम्ह बुया बल्चाय बां बिइगु ज्या बिया सुरु याइ । थ्व दिं कुन्हु थ्व प्याखँ ल्हुइपिं फुक द्यःपिंस भ्वय नया कन्हे कुन्हु सुथ न्हापाः म्वल्हुया बल्चाय् च्वंम्ह नासः द्यः व गुरुपिन्त दर्शन याय धुंका न्ववायेगु याइ । अले गँ प्याखँ सेनिगु ज्या जुइ । द्यः प्याखँ ल्हुइपिं मंका क्षमा पूजा याइ । गुरुपिंन्सं थःथःविधि कथं सोमबार, मंगवार, विहिवार, शनिवार व आइतवार न्याम्हस्यां थीःथी ज्या यायगु याइ । थ्व धुंका मंगवार कुन्हु गणेश जुया प्याखँ ल्हुइमेस्यां ब्रत्त च्वना, सुचि याना छम्पि गांमय् च्वंम्ह गणे द्यः याथाय् वना प्याखँ ल्हुइतः मागु न्याग घंघलाय् बां स्याना गणेद्यः साला गुथीया बल्चाय् हया गुरु पिंत ल्हायगु ज्या याइ । थ्व हे विधि कथं बाघ भैरब थासं बाघ भैरव , इन्द्रायणी पिगंमं इन्द«ायणी, पश्चिम बल्खुं बाराही, काली, ब्रम्हायणी, कुमारी, रुद्रायणी (गंगा), आइतबार, सोमवार, मंगलबार, विहिवार बां स्याना पूजा याना साला हपिं द्यः पिंन्त आगंछेँय् पलिस्था याइ । 
 
                       अले लिपा वइगु सोमवारया दिंसं वल्खुइ च्वंम्ह बैष्णुवी द्यःथाय् वना भ्याचाः संकल्प याना देवीयातः साला आगं छेंय थापं याना बां बिया पूजा याइ । अथेँ हे आइतबार इन्द्रायणी पिंगमय् वना इनद«ायणीदेवी यात साला बां स्याना बल्चाय् थापं याइ । बाघ भैरवया देगलं मंगलबार सिंहिणी, विहिवार व्याघ्रिण्ी नं बां स्याना पूजा याना द्यःसाला आगंछेँ हइ । 
जुग चह्रे कुन्हु गणेद्यः जुया प्याखँ ल्हुइमहेस्यां बुंङ्गया जंगलं बेलीया माः माला हया बल्खुइ बैष्ण्वी देगया पुखुचाय् पी । भैरव, बैष्णवी, बाराही जुइपिंन्सं पुखुचा पिउगु मा लिना गोेम्पय् तया द्यः थापं या्यगु याइ । थ्व गोम्प आगं छेँ हया दक्व सिनं सीका भू याना प्रसाद नयगु याइ । शनिवार कुन्हु आगंछँेय तान्त्रिक विधि कथं घंघला पूजा याना बां स्याना खिं, बौ, डमरु थाना तुयूगु लं फिना ख्वापाः मपुसें प्याखँ ल्हुइ । थ्व प्याखँनय् सिंम्हणी व्याघ्रिणी जुपिंन्स डमरु थाइ । थ्व प्याखँनय् मंू बाजँ कथं दबखीं, बौ व ताः गुथिया गुरु पिंस थायेगु याइ ।  मू बाजँ नापं द्यः जात्रा लंपुलिइ न्हयाकी बलय् गुथि खलःया दुज पिंस निपू काँः पुइगु याइ ।
प्याखँ स्यनेघुंका आगंछेँय् स्वकः ख्वापाः मपुसें तुयूगु जामा फिना बाजंथाना प्याखँ ल्हुइ । थ्व प्याखँ ल्हुइ सिध्यवं प्रसाद नयगु याइ । अथे हे आगंछेंय् पिने दों ख्यः धाइगु थासय् नं प्याखँ ल्हूइकेगु याइ । थ्व प्याखँ ल्हुइगु ज्या दकले न्हपाः मोहनी नःलि स्वाँ स्वनिगु दिं कुन्हु जुइ । स्याक्वत्याक्व कुन्हु थ्व गँ प्याखँया ख्वापाः तया तःगु छेंय् नं मखंक खुया हयगु कथं गुरुपिंन्सं हइ । अले माः माःपिं द्यः पिन्त ख्वापाःलःल्हायगु ज्या जुइ । बाघ भैरव देगः नापं लिधंसाःदुगु छेय्ं हया दक्ब ख्वापा यातः तुयुगु कापःमकतं तोपुया जवं खवं खिचां मथिक किपु गुँया पश्चिम पाखें इन्द्रायणी पिगंमय् यंकी । 
 
                      बज्राचार्य गुरुपाखें छसि कथं ख्वापाः लःल्हायगु ज्या जुइ । छगु छगु याना हइगु ख्वापाः यातः पिगंमय् थी थी द्यःया ख्वापाः थी थी थासय् पलिस्था याना व्याइ । थ्व ज्या सिध्ये धुंका पिगंया पूर्व व दक्षिण पाखें च्वंगु गथुफल्चाय् दक्व गुरुपिं, द्यःजुइपिं व ग्वाहालि खलतः मुनेगु याइ । अले ज्यापू खलःपिंसं पिगंमय् बोया तःगु ख्वापाः यात पूजा यायगु याइ । थ्व पूजा म्हःचिपं मजुपिं मिसा मस्तयसं याकेगु चलन दु । थ्व पूजा याय धुंका प्रसादया रुपं समय्बजि नयगु चलन दु । थ्व प्रसाद नयधुंका प्याखँनय् बोति काइपिंतः गुरुपिंसं ख्वापाः लः ल्हायगु ज्या जुइ । दशमीया व नवमीया दिं कुन्हु बःहनि पिगंंमय् थापं याना तगु मोहनीसिन्ह गणेश द्यः नं द्यः पिन्त टिइकेगु याइ । फुक्व द्यः पिंसं पूजा व मोहनी सिंन्ह टिके धुंका ख्वापाः पुया किपु नगरय् देशाःचाःहिलिगू याइ । देय् चाःहिलिगु इलय् द्यः ध्वाका, समल त्वा, उमा महेश्वर, लायकु दरवार, बाघ भैरव, भरिंपुखु, सिंध दुवा, पांगा, नगां मय् प्याखँ ल्हुइ । अले नंगां नासः द्यः पूजा याना दक्व द्यःपिन्सं प्याखँ ल्हुया द्यःल्हायगु याइ । द्यःपिंसं ख्वापा तइगु सतःछें नापं ल्हों देगःलय्, बाघ भैरव वनिगु लुखाय नापं च्वंगु सतःछें कवय् द्यः ल्हायगु याना ख्वापा तयगु याइ । दशमी कुन्हु देशा चाःहिलिगु व अराधना प्याखँ धुंका दिकुगु प्याखँ प्यन्हु फी मत्यः धका सतःछेंक्वय् बहनी जाग्राम च्वंनिगु धाइ, उखुन्हु प्याखँ ल्हुइगु याइ । थ्व दिंकुन्हु ल्हुइकेगु प्याखँ कन्हे खुन्हु नं न्हिछि हे जुइ । 
थ्व बाघ भैरव प्याखँ किपुया लायकु, येंय्या हनुमान ध्वाका, यलः लायकुलिइ नं ल्हुइकेगु याइ ।  थ्व प्याखँयातः भक्तजन पिंन्स थःयोगु थासय् नं सता ल्हइुकेगु याइ । अथें ब्वनि बलय् बलिपूजा व भ्वय  खर्च ब्वनिम्हेस्या  हे व्यहोरे यायमाः । अथे  फर्माइस ल्हुइकेगु प्याखँ नियमित कथं जुइ मखु । 
 
                       येँया झिँनिदया जात्रा थें किपुया झिँनिदँया जात्रा नं भलभल अष्टमि कुन्हु हे कोचायकी । प्याखँ क्वचायकेगु दिं कुन्हु नँगाँया नासः द्यः पुजा याना नापं च्वंगु ननि फल्चा न्ह्योने जात्राया अन्तिम प्याखँ ल्हुइकेगु याइ । थ्व पाखँ धुंका सीजा ह्वलेगु (वंगु जात्रा बलय् ला सीजा नकेगु न यागु खने  दत)  याइ । थःथे सीजा होलय् धुका सीबाजँ थाना द्यः पिनित किपु पाखे न्हयाकी । थःथे नँगामँ न्हयाका बाहिरि गाँया दुखा ल्हो निसें गणेद्यः छम्ह त्वता द्यःपिं छसि कथं सीगु जुइ । थःथे सीपिं द्यःपिंत नं पासा पिंस ज्वना मजा चिबाहा, गुतँ पौ देग त्वाया लँपु जुसें लाय्कुलि थ्यका छसि कथं ग्वतुकी । अले लाय्कुलि गुरुपिंसं तान्त्रिक विधि कथं ल त्वंका द्यःपिन्त थना जात्रा न्हयाकी । थःथे न्हयाकुगु जात्राय् गणेद्यःफल्चा निसें द्यःपिं हाकनं छसि कथं सीगु जुइ । थुगु कथं जात्रा न्हयाका उमा महेश्वरया क्वं इण्द्रायणी पिगँमय् थ्यका द्यः पिं सीगु ज्या पुवनी । अनलि विधि कथं द्यःपिंनिगु ख्वापाःत त्वका पिगँमय् थःथगु थासे तयेगु याइ । अन लिपाः द्यःजुपिंत दुज पिंसं थःथःगु ख्वापा ल्हातय् ज्वंका दीखु या द्यःद्धीपय्  यँका ख्वापा उयगु ज्या याना जात्रा क्वचायकी । अन प्यनु लिपा गुरुपिंसं पिगंमय् वना तान्त्रिक विधि कथं द्यःजुपिं विया तःगु न्यास लित कायगु ज्या याइ ।
 
ख्वपया नवदुर्गा प्याखँ
 
                       ख्वपया थीःथी जात्रा, मेला, पर्व व नखःचखः मध्ये श्री नवदुर्गा प्याखँ नं छगु ऐतिहासिक जात्रा खः । थ्व जात्रायातः तान्त्रिक विधि विधानया रुपं माने याना वयाच्वंगु दु । थ्व जात्रा गबले् निसें न्ह्याना वया च्वंगु धका तिथिमिति कुला धाय मफुसाः लिच्छवी काल निसें न्ह्याना वयाच्वंगु धका अनुमान याना तःगु दु । ख्वपय् अशान्ति व अनिकाल जुया च्वंगु इलय विद्धान पिंगु सल्लाह कथं जुजु सुवर्ण मल्लंं बन्द जुया च्वंगु नवदुर्गा प्याखँ यातः नें.स.ं६३३ सं हाकन  देया रक्षाया निंतिं ख्वपया त्वाःत्वालय् पूजा याना लायेकु जात्रा न्ह्याकुगु धका इतिहासय् च्वया तःगु दु । 
थ्व नवदुर्गा प्याखँ ख्वपय् च्वंपिं वनमाला पिन्स म्वाका न्ह्याका वयाच्वंगु खनेदु ।  नेपाल मण्डलय् लिच्छवी कालय् राज्य व नगरयात अनिष्ट पाखें बचय् यायेत थी थी शक्ति पिगंम छचायंक हिइकेगु चलन खनेदु । ख्वप नगरयात नं ब्रम्हायणी, महेश्वरी, कुमारी, बाराही, इन्द्रायणी, महालक्ष्मी आदि द्यःया पीगंन छचाकलं हिइका याना तगु खनेदु । थ्व प्याखँ नं ब्रम्हायण्ी पिगंमं पिथंना देय यंक चाःहिका ब्रम्हायणी पिगंमय् हे क्वचाय् केगु याइ । थ्व प्याखँया बारे दुवाला स्वय्बले ख्वप देय्यात भिंकेगु निंतिं मनुयाके द्यः दु्रब्याका द्यः प्याखँ ल्हुइकेगु याना तःगु खनेदु । 
 
                         थ्व नवदुर्गा गँ प्याखँया बारे छगु न्हयेइपुगु बाखंदु । ख्वप नगरया पुर्व पाखें घना जंगलय इकुडो धाइगु थासय् नवदुर्गा भवानी द्यः थःगु गण द्यःपिं नापं गँ प्याखँ हुलाच्वंगु जुल । व जंगलया लंय् वनिपिं मनूतयत भोग कायगुयाना च्वन । छन्हु छम्ह तान्त्रिक आचाजु वहे लँय् वया च्वंबलय् द्यः पिंन्स नापं लाना भोग कायत सन । तान्त्रिक आचाजु थःतः भोग काइगु सिया द्यः पिन्त विन्ति चढेयाना धया दिल । हे भगवान, जिगु भोग काय न्ह्यो जी छिपिन्गु पूजा छक याय । द्यः पिंस नं आचाजु यागु खँ माने जुया पूजा याके बिल । आचाजुं थःगु तान्त्रिक शक्ंित फुक्वंं द्यः पिन्त चिना थःगु कलान्ती तया, छेंय् सुना नं मखंगु कोठाय् तया, गोप्य रुपं गँ प्याखँ ल्हइुका तल । थ्व खँ आचाजु यातः शिक्षा व्यूम्ह गुरुं सिइका थ्व द्यः गूरु यात बिइत फोना दिल । आचाजु नं थम्ह गुरुयागु खँ त्वाल्हाय् मफया फुकं द्यःपि गुरुयात बिया दिल । गुरु नं थःगु छें छगु कोठाय् गोप्य रुपं द्यः तया प्याखँ ल्हइुका तल । गुरुया छमह जात मखम्ह कला यातः फुक्व कोठाया ताःचाः बिइग ुयाइ तर द्यः दुगु कोठा यागु ताःचा बिइगु याइ मखुः जुया च्वन ।  छन्हु गुरु ताःचाः लोम्हंका स्नान यायत वना च्वंगु इलय् गुरुया  वहे कला नं ताःचाः चायका वो कोठाय छु दु  धकाः स्वल । अथें स्वय म्हजिम द्यः स्वगुलिं फुक्व द्यः पिं तन्त्रवशं फुके जुया पिने वल । नगरया पुर्व पाखें वना च्वम्ह फा छम्ह लंय् नापं लातः व फायात  भोग कया न्ह्योने न्हयाना वन । थ्व घट्नायातः गुरुं सिइका द्यः पिन्त नाप लाना हान बिज्यायत इनाप याना दिल । गोप्य रुपं च्वना च्वंपि द्यः पिन्त फुक्व मनूतयसं खने धुंकल । थौ निसें नवदुर्गा द्यः या प्याखँ म्वापिं मनूयात सेना दक्वसिन खंक ल्हुइकेत धया दिल । गुरु नं द्यः पिन्गु खँ यात माने जुया थःगु छेँ स्वाँ ज्वना वम्ह मालीयातः द्यः प्याखँ ल्हुइ त न्ह्याः की म्हाःँ  धका न्यना दिल । माली नं न्ह्याः धका धया दिल । अले थःगु स्वाँ तइगु स्वाँ पिचाय् तःया  थः थिति दक्वसित नं सता मेपिं सुना नं मखंक सेना दक्वसिया न्ह्योने प्याखँ ल्हुइगु यातः ।  श्री नवदुर्गा भवानीया गँप्याखँ विशेष मुद्रा व विधि मन्त्र उच्चारण याना ल्हुकेगु तान्त्रिक प्याखँ खः । थ्व प्याखँ ल्हुइम्ह मनू नं थःथःगु द्यः पिन्गु ख्वापाः पुइमाः । थ्व ख्वापाः पुइ धुंका इमिगु म्हय् द्यः दुहां वइधका धाइ । थ्व द्यः यातः यक्व हे श्रद्धा व सम्मान यायगु याइ । 
 
                              थ्व द्यःप्याखँ ल्हुइपिंगु धलःस्वय्गु ज्या दिल्ला पुन्हि धंका आइतवार वा बसुवा कुन्हु जोसीं च्वया द्यःगुथीयार पिंन्त लःल्हाई । थ्व ज्या यातः द्यःपा स्वयगु नं धाइ । थ्व ज्या नवदुर्गायागु द्यःछेँय् हे जुइ । गथाँ मुग चह्रे कुन्हु निसि याना  द्याँ ल्हाना नासःद्यःया थाय् वना प्याखँ हनेगु याइ । थ्व हे दिंसं द्यः पलिस्था याना तःगु क्व ज्वना द्यः जुइपिं जःफुक मुना याछेँ धागु थासय् नवदुर्गा द्यःथःछेँय् वना द्यः प्याखँ यागु ख्वापाः दय्किपिं पुं तयसं पुजा याकेगु ज्या जुइ । थ्व पुजा धुंनेवं द्यःछेँय् ल्याहा वया पालं याइ । अन लिपा द्यः क्वं यंका कुतयथाय् चाः फ्याय्गु धका भैलःद्यःयात पुजा याका द्यःछेँय् हे ल्याहा वया भ्वय् नइ । थ्व दिं निसें प्याखँमुँ पिंसं थःथः गुरु पाखें प्याखँ स्यनेगु ज्या जुई । अले मोहनीया महाअष्टमी कुन्हु नासःदया थायाय् वना घंघला  लःल्हाय्गु ज्या जुइ । थ्व ज्या धुंधा नासःद्यःया न्हयोने ख्वापाः मपुसें प्याखँ ल्हुइगु याइ ।  कन्हे नवमी कुन्हु द्यःछेँय् लहिना तःम्ह खःमें यात पुजा याना म्हासु सिंन्ह नं बुइका ब्रम्हायणी पिगंमय् तक ब्वाकेगु ज्या जुइ । थ्व हे बहःनि पुं तयसं देयका तःगु ख्वापाः दुगु थासय् वना पुजा याना ख्वापाः ल्ह्वना ब्रम्हायणी पिगंमय् यकी । व हे ईलय् खःमें यात पिगंमय् बां बिइ । थ्व खःमेंयागु लाः प्रसादया रुपं पुं तयतःनं बिइ । द्यःख्वापाः पिगंमय् पलिस्था याइ । थःथें ख्वापाः पलिस्था याइ बलय् मेंपिन्स स्वय् मज्यु धका धाइ ।  चाःलं कुन्हु दक्व मनुयात द्यःपुजा याके बिइ ।   थ्व दिंसं सुथं निसें पिगंमय् द्यः पूजा याइपिं यक्व हे दइ । भक्तजन पिनिगु पूजा सिध्यवं दक्व द्यः पिन्स थःथःगु ख्वापाः, लं फिना प्याखँ ल्हुया देय् दुने द्वाँहा वयगु कथं  लायकुलि थ्यंक वइ । अन श्री तलेजु भवानी सुवर्णद्धारय् पूजारी यागु ल्हातय् बिज्याना च्वनि । थुकी यात पाया न्हयाकेगु धका धाइ । थ्व हे थासय् छम्ह सल नं तया तःगु दइ । श्री नवदुर्गा द्यः व श्री तलेजु भवानी सुवर्णद्धारय् नापलाय धुंका, नवदुर्गा द्यः प्याखँ ल्हुइगु याइ । थ्व प्याखँ ल्हुइकेगु इलय् श्री नवदुर्गा द्यः व  तलेजु भवानीया दथुइ भलाकुसारी व प्रसाद हिलाबुला यायगु याइ । थ्व निम्ह द्यः तता केंहे नं खः धका धाइ । थ्व प्याखँ सिध्यधुंका सुवर्णद्धारय् तया तम्ह सलयातः न्हयो न्हयो तया थ्व निम्हः द्यःपिं देय् चाःहिला थःथःगु थासय बाया वनिगु याइ । थ्व दिंसं निसें थ्व प्याखँ ल्हुइगु ज्या न्हयाकी । थ्व दिं त्वता में में दिं बलय् सुना नं सत्ता प्याखँ ल्हइुकेतः द्यः ब्वने ज्यु ।  
 
                            थ्व प्याखँनय् दक्व याना झिँस्वंगु ख्वापाः दु । थ्व ख्वापाः मध्ये महा द्यः यागु ख्वापाः म्वापिं मनू तयसं पुइगु याइमखु । तर श्री नवदुर्गा भवाणीयातः पूजा याइबले झिंगुगु भाग छायगु यामाः । अथँे द्यः पूजायाइ बलय् झिंस्वंगु भाग द्यःपिन्त, सिफःद्यो, पात्र, खिं, तं ,द्यः नकी, व काँयात भाग तयमाः ।  ख्वापाः पुइपि द्यः जक ब्रम्हायणी, महेश्वरी, कौमारी, वैश्णवी, बाराही, इन्द्रायणी, चामूण्डा, महालक्ष्मी, भैरव, गणेश, सिंहिणी, व्याध्रिणी खः । थ्व प्याखँ ल्हुइकी बलय् स्वंगु मू बाजं थायगु याइ । थ्व बाजं थुगु कथं दु  खिं, तँ, काँय खः । थ्व बाजं तयतः नं द्यः या रुपं पूजा यायगु याइ । 
ख्वपय् दच्छिःया दुने पिःपेकः डाँ लायकेगु प्याखँ ल्हुइकेगु याइ । थ्व प्याखँ मःूचुकय् शुरु जुया मूःचुकय् हे सीःजा नकेगु याना भलभल अष्टमीया दिंसं ब्रम्हायणी पिगंमय् सीथं यंका ख्वापा छोयकेगु याइ । 
थ्व प्याखँ मूःचुक त्वता त्वंचा,  सुजमाह्री, तचपाः, क्वाथंडो, गःछें, दथुत्वाचाः, इनाचो, गोलमढी, याछें, तौमडी, तालाक्व, नासःमना, न्हसंत्वा, गाहिती, क्वाछें, टिबुकछें, बिलाछँें, खौमाः याबी, याला छेँय्, इताछें,  बालाखु, तुलाछें, चोछेँ, इच्छुत्वा, सूजमाह्री, (वाःपिं पाछायकीगु) आदि थासय् ल्हुइकी । ख्वप त्वता थ्व प्याखँ येंय् टोखा, चपली, तुप्या, गोलय्, सांग्ला, छुगां, संकोय् नं ल्हुइकेगु याइ । झिंनिदँय छक येंय हाडिगांमें नं थ्व प्याखँ केनेगु याइ । अले ख्वप नगर पिने  थिमी, नकेदेश, वोडे, चांगु व  बनेपा, नाला, खडपु, चौकोट, धौख्यः, पन्ति आदि थासय् नं थ्व प्याखँ ल्हुइकेगु याना वया च्वंगु खनेदु । 

थेच्व  झिंनिदँया नवदुर्गा ज ात्रा
 
                   थेच्व च्वपिं माली तय्गु झिँनिदँय् छक नवदुर्गा जात्रा माने याइगु खःसां दँय् दच्छिं थी थी नखः चखः हना यःमरि पुन्हि कुन्हु बालकुमारी, ब्रम्हायणी व नवदुर्गा द्यःया जात्रा तःजिक माने याइ । थ्व थेच्वय् च्वंपिं सकल नेवाः तयगु दुधंगु सांस्कृतिक व म्हसिका खः । दँय दसं थ्व जात्रा प्राचीन कालनिसें न्ह्याना वया च्वंगु खनेदु । थ्व जात्रा क्वय्लाछि व च्वय्लाछिइर्¬ थी थी कथं न्ह्याका वया च्वंगु खनेदु । थ्व जात्रावलय् च्वय्लाछि च्वंम्ह बालकुमारी अले क्वय्लाछि च्वंंम्ह ब्रम्हायणी व नवदुर्गा द्यःयातः थी थी कथं जात्रा यायेगु चलन दु । नवदुर्गा द्यःयातः गँःद्यः नं धाइ । नवदुर्गा द्यः जात्रावलय् व मोहनीया चालँ खुन्हु यानाः दय्ँ निकःजक प्याहाँ वइ । थौंकन्हे थ्व द्यः यातः माली अथवा गथु पिंन्स संरक्षण यानाः वया च्वगुलिं गथु द्यः नं धाइ ।
 
                  पुन्हिया छन्हु न्ह्यो निसें सुरु जुइगु थ्व जात्राया न्हापाःगु दिंसं च्वय्लाछि व क्वय्लाछि निम्ह निम्ह बाँ होमे स्याइ  । थ्व होमेयागु लाः न्हेय्गु ( ७ ) गुथी नं उति ग्यंक इना छुवय्ला भू माने याइ । थ्व हे दिं कुन्हु बहनी पाखें वडा नं. ३ चोम्ह मुकुट भैरबयातः धिमे व ताइनाइ बाजं थाना च्वय्लाछिइ चाल्हुइकी । अले च्वय्लाछि चोम्ह नासः द्यः खवे पाखें तयाः जात्रा न्हयाकी । 
अथेंला जात्रा सुरु जुल धका सुचं बिइगु ज्याः पुन्हि कन्हे कुन्हु हे च्वय्लाछि व क्वय्लाछि च्वपिं सिंहनि व ब्याङ्गनियात सख्वालं पाःकुगु दिं नं निसें हे जुइ । थ्व संख्वालं पाःकय्गु ज्या थेच्वय् च्वंगु सरस्वती गुथीयात लःल्हाना तःगु खः । यदि थुकुन्हु निसे सुं नं मनूत सित धाःसाः भिंmस्वनुया ज्यानं थ्व हे दिंसं यायेमाः । थ्व याना तगु मुं कारण धैइगु हे द्यः पिंगु शुभ ज्या चिपं मजुकेगु खः ।
पुन्हि कुन्हु परदेशय् च्वपिंत जात्राय् सतः वनेगु ज्याः याइ । थ्व हे दिंसं बहनी ब्रम्हायणी व बालकुमारी यातः गुंगु र्निर्संग बाजं थाना द्यः छेंय् नं. पिकया, म्वःल्हुका, सुचुपिचु याकाः बाजं थाना न्याम्ह खाः स्याना, द्यःपुजा याइ ।
क्वय्लाछि ब्रम्हायणीयातः जात्राः यानाः पिगंमय् येंका स्वचाः हिकाः, क्वय् वा उत्तर पाखें स्वका दिकी, अथें हे च्वय्लाछि बालकुमारी द्यःयातः नं ब्रम्हायणी द्यः यातः थेंतु पिगंकय् हयाः स्वचा हिका पश्चिम पाखे स्वका दिकी  । निम्ह द्यः पिंतः दिके धुंका थ्व दिन यागु जात्रा क्वचाकी ।
 
                   थिंलागा पारु कुन्हु सुथंः निसें पिगंमय् जात्रा जुइ । थ्व दिं कुन्हु च्वय्लाछि च्वंगु प्यंगु गुथी व क्यय्लाछि च्वंगु स्वंगु गुथी नं छम्ह छम्ह भ्यायचाः पिगंमय् बां बिइ । व न्हयम्ह ( ७ ) भ्यायचाः मध्ये न्हापांः मुहाम्ह भ्याययागु छ्यों जीर्णंजुइक होमे तया छ्वइ । अले दक्व गुथिया दुजःपिं थःथः मुनाः भ्वय् नइ । भ्वय् नयगु ज्या सिधयधुका बहनी पाखें फुक्व गुथीयापिं दुजःत थः थः गुथी हे वनेगु याइ । अले बालकुमारी व ब्रम्हायणी यात नं पिगंमय् स्वचाःहिकाः बालकुमारी यातः बालकुमारी द्यःछेंय् लिक्क अले ब्रम्हायणीयात क्वय्लाछि लसकुति दिकेगु याइ । छुं ई लिपाः नवदुर्गा द्यःयात द्यःछें नं पिते हइ । क्वयलाछि छःचाः प्याखँ ल्हुइकी । अले ब्रम्हायणीयात खतय् तया नवदुर्गा द्यःया ल्युल्यु क्वयलाछि चाःल्हुइकि ।
 
                   च्वयलाछि व क्वयलाछि दथुई थेनेवं ब्रम्हायणी द्यःयातः नवदुर्गाया द्यःछेंय् न्हयोने दिकेगु याइ ।  तर नवदुर्गा द्यःयातः धाःसाः थेच्व गां हे चाःल्हुकी । अथें देय् चाःल्हुइकेबलय् च्वय्लाछि च्वंम्ह बालकुमारी द्यःयात नवदुर्गा द्यःछेंय्  च्वंम्ह मेंम्ह बालकुमारी द्यःनं भाग्याइ । च्यलाछि च्वम्ह बालकुमारी द्यः नं नव दुर्गा द्यःया थाय च्वम्ह बालकुमारी द्यmयात खा छम्ह बां बी ।
नवदुर्गा द्यःयात देय् चाःल्हुकी धुका ब्रम्हायणी द्यःदेयग क्वय् न्हयोने प्याखँ ल्हुकी । बालकुमारी व ब्रम्हायणी द्यःयातः न बाजं थाना देय् थकाली नकिं व जःपाःला पिन्सं पूजा याना देग फल्चाय्  दिकेगु याइ । थ्वःयातः हे थेच्वयागु भाषां न्याः न्यायोकिगु धका धाइ । थ्वः न्यायोकिगु व नवदुर्गा द्यःप्याखँ ल्हुइकाः में छम्ह बां बी । थ्व बांयागु ही दक्व द्यःपिंसं त्वनिगु याइ । थ्व ही त्वनेगु ज्या सिधयधुका दक्व द्यःपिं नं प्याखँ ल्हुइगु याइ । थ्व प्याखँयात असुथयगु नं धाइ । थ्व द्यः प्याखँ सिमधयकं सुन मनुत छेँय् ल्याहाँ वय मज्युधका धाइ । थ्व प्याखँ ल्हुइ सियधुका थ्व दिन यागु जात्रा क्वचाकी । 
कन्हे कुन्हु वा द्वितीया दिंसं सुथंनिसे क्वय्लाछी नवदुर्गा द्यःप्याखँ ल्हुइकी । थ्व दिं यातः क्वय्लाछि स्वय्गु दिन वा न्हिप्याखँ नं धाइ । थ्व दिं जात्राया मुं दिं खः । थ्वहे दिंसं थःथी थीपिं जात्रा स्वझाइ । थ्व दिं कुन्हु नवदुर्गा द्यः यात द्यःपूजा याःवयाःच्वंपिं यक्वहे दयाच्वनी । अथें जुया थ्व दिन यात छाय्–छी यायेगु  दिं नं धाइ । थ्व दिं खुन्हु न्हिछि द्यः प्याखँ ल्हुइकी । में छम्ह बां बी । थ्व बांयागु ही दक्व द्यःपिंसं नं त्वनी । ही त्वनेगु ज्या सिधयधुका दक्व द्यःपिं प्याखँ ल्हुया असुथइ । थ्व असुथयगु ज्या सिधय्ःधुका नवदुर्गा द्यःयात द्यःछेँय् पाखे न्ह्याकी । द्यःछेँय् क्वय् छक प्याखँ ल्हुइका थतःयंकी । छुं लिपा ब्रम्हायणीयात नं बाजं थाना द्यःखः प्वल थछ्वय्गु धकाः द्यः छेंय् थछ्वइ । 
कन्हे कुन्हु सुथन्हापाः बालकुमारी द्यःयातःनं द्यःछेंय् थछोइ । अले च्वय्लाछिं हयातम्ह मुकुट भैरब द्यः यात नं बाजं थाना द्यःछेंय् हइ । थ्व दिं यात सिन्हःजात्रा धाइ । थ्व दिं निसें थेच्वया जात्रा क्वचाइ । 
च्वय कनागु दँय् दच्छिं जुइगु जात्रा नापं थेच्वय् झिँनिदँय छक नवदुर्गाया गँ प्याखँ जात्रा नं न्हापाः निसें न्हयाका वयाच्वंगु दु । दिल्लागा  त्रियोदशी  निसें नवदुर्गा द्यःया झिँनिदँया प्याखँ न्ह्याकी । थ्व दिंसं खाःछम्ह व हेँ छम्ह बां स्याना पुजा याइ । अले लच्छि तक थ्व देगया लुखा तिना तइ । थ्व लच्छिया दुने सुन मनु द्यःछें दुने दुहाँ वनी मखु । थ्व दिं निसें झिँनिदँया प्याखँ क्व मचायकं थेच्वय् छुं नं. बाजा थायगु, ईहिपा, कय्तापुजा , फल्चाय च्वना तुती यखायकेगु  व सुलुपुइगु ज्या याय  मज्यु धका धाई । 
 
                      गुँलागा त्रियोदशीया दिं पुजा याना ताःचा चायका भ्वय नयगु याइ । थ्व दिं कुन्हु झिँनिदँया प्याखँ ल्हुइके बल्चाः ग्वयगु धका व हे द्यो छें न्ह्योने बलः ग्वई । व हे बल्चाय् द्यः प्याखँ स्यनेगु याई । द्यःगुथि च्वंपिं गुथियारत दक्व तिनमाने भञ्ज्याङ्गे वना बाँलागु सिंमाय् द्यः पूजा याना व सिमा ध्यना अन निसें गन नं मदिकुसे द्यःछें तक हयगु याइ । थ थें मदिकस्य हयगु ज्या द्यः बुईम्ह छम्हस्यां जक यासा गाः । में मेंपिं द्यः तयसं थःथ मनुयात कुुबुइकेगु याई । थ्व दिं कुन्हु थेच्वय् च्वंगु दक्व बाजं ज्वना वाःय् धागधाः धाईगु थासय् तक वना लसकुस याना द्यःछें हई । 
थ्व दिंसं बन्हि दक्व द्यःपिंस निःलः काःवनेगु धका थः थ थासय् वनेगु धका सुना नं मखंक लःका वनेगु याई । थ्व थुगु कथं दु : —
 
(१) िसङ्गनी, ब्याघिनी, थेच्वया ह्यामुन्याः पुखु – 
२) भैरब –छम्पी दह 
(३) दक्षिणकाली – (अजिमा) – खुल्डोचा, थेच्व वार्ड नं. ८
(४) बज्रबाराही (बाराही) –बुली दह, गो
(५) महालक्ष्मी (मनमयजु) – ह्यामुन्याः पुखु
(६) ब्रम्हायणी (म्हासुख्वाः) – ह्यामुन्याः पुखु
(७) बालकुमारी (कुमारी) –ह्यामुन्या । पुखु
(८) बैष्णवी –वाउंख्वाः) – नागदह, धापाखेल । 
(९) गणेश (गणे द्यः)  – गलवन न्हवं, थेच्व । 
(१०) महादेव (गंगादेवी) – (तुयुख्वाः) – ह्यामुन्या पुखु 
 
                     अले दक्व द्यः पिंसं थः थगु थासं लः हया बःहनी सुनान मखंक तान्त्रिक विधिं पिखालखुई द्यः पुजा याना भ्वय् नयगु याई । थ्व दिंसं दक्व द्यःप्न्ति निम्ह निम्ह खाः बां मा । थ्व खाः छम्ह द्यः साले तः, छम्ह नवदुर्गा द्यःयात बांः बिइत । अन लिपाः धाँग सिंयात नासः द्यःलाछी तया पूजा याइ । दक्व द्यः पिन्त लं, ख्वापा मपुइकुसे घंघला जक न्ह्याका लसकुस चाःल्हुइका हयगु याइ । थुगु इलय् बाजं थाइपिं द्यःछेंय् हे च्वनि । थ्व धुंका झिँनिदँया प्याखँ स्यने क्वचागु धका धाइ । अले कौलाथ्व सप्तमि कुन्हु पुलागु ख्वापाः फुक्क तले थःछोयगु याइ । अले न्हापाः हयातगु नीलःखं दक्व द्यःखल पिंसं म्वःल्हुइगु याइ । अले निम्ह जोगीपिं, बाजं थाइपिं फुक्क द्यःखल नापं सुनाकुथी बालकुमारी द्यःया पिगंमय् वनि । अन थ्यंका पिगंमय् होम याइ । थ्व होम यायतः बखुं छज्वः,चःखुं छज्व, ताहाःछज्व व न्या छज्व, में छम्ह बां माः । थ्व यज्ञ सिधय् धुंकाः झिंछम्ह द्यःपिं सुनाकोथि क्वय् जरुंगाः वना नीलः काःया हयगु व झिँछम्ह द्यःया झिँछम्ह हे पोमितः वना यलःय चित्रकार पिंसं देयका तःगु न्हुःगु ख्वापाः कया हइ ।  लः हया होम कुण्डले तई । अले में छम्ह  स्याना झिँम्ह द्यः पिन्त म्वाःहिः त्वंका थ्व हे बांया लाः तया दक्व द्यः खलपिंन्त भ्वय् नकेगु याइ । थ्व भ्वय् नय बलय् द्यःखलः तयसं नं थःथःगु हे छेँय् भ्वय् ज्वलं ज्वरे याना हइ । अले थःथःमनूपिं च्वना भ्वय् नयगु याइ । भ्वय् नय धुका फुक्क द्यः पिन्त न्हुःन्हुःगु ख्वापाः, लं फिका थःथः मनू पिंसं मत बिया द्यः छेंय् न्हयाकी । थ्व थेँ हेबलय् कुमारी द्यःयात सुनाकोथीयागु धौबजि खेलय् छम्ह हेँ बां बिइगु याइ ।  
 
                       पुलांगु बाखं कथं न्हापाः न्हापाः थ्व नवदुर्गा द्यः न्हेस गुथी चलेया वयाच्वंगु खः धका धाइ । थ्व द्यः यात झिँनिदँय् छम्ह मनू बां बिइगु चलन दु धका धाइ । थःथें मनू बां बिइगु झ्वलय् थःथाय जात्रा स्व वया च्वंम्ह थः हे जिलाजं यात भोग बी । थ्व खँ थः म्याय्मचा सिका थः भातयात भोग ब्युगली थ्व द्यः थौनासें माली तयगु ल्हातय् लाः वनेमा धका सरा बी । थ्व ईलय् निसें थ्व द्यः माली तय्सं चलेयाना वया च्वंगु खः धका धाइ ।
पुलांगु बाखं कथं सिम्हाःद्यःयात न्हेस गुथि दुतयंके फतकी नवदुर्गा द्यः न्हेस गुथि याः गुथियार पिंसं हे चले याय खनी धकाः धाई । निसः व नीदँ न्हापा तक थ्व नवदुर्गा द्यः न्हेस गुथिं चलय् याना वया च्वंगु धका धाई । दँयदँसं न्हेस गुथिपिंस सिम्हा द्यः यात गुथिछें थतयंकेतः कुत यासां दुतेयंके मफुनि । थ्व गुथि न्ह्योने थ्यनकी भ्याचा छम्ह बां बिया पुजा याना न्ह्याकु्म्ह द्यःयातः द्यःछेंय् न्हयोने थ्यंका प्याखँ ल्हुइक थतयंकी । 
कौलाथ्व नवमी दिंसं झिँगुम्ह द्यःया दुजः पिंसं चान्हे जाग्राम च्वनी । कन्हे चालं कुन्हु यलःया लायकुली द्यः न्हयाकी थ्व द्यःलगखेलय् थ्यनकी यलःय् याम्ह तलेजु भवानी क्वहाँ बिज्याकी । अले द्यः पालानं नवदुर्गा यातः स्वक चाःहिलेगु याइ । तलेजु भवानी यात मूं द्यःनापं स्वक ल्वाका दर्शन याकी । अले तलेजु भवानी यात भैलःद्यःनं स्वाँमा क्वखायकेगु धुंका गँ प्याखँ खलः लायकु पाखेँ न्हाना वनी । यलःलायकुया मुं चुकया लुखाय् थ्यने वं लसकुस याना द्यः खलःयात मूं चुके दुकायगु याइ । अन भैलःद्यःनं भवानीयात पसुका व तःसी छाइ । थ्व ज्या सिधे धुंका तलेजु भवानीयातः वसपोल यागु द्यःछेँय् बिज्याकेगु याइ । अले नवदुर्गा द्यःखलःपिंन्त नं आराम याकेगु याइ । 
तलेजु भवानीयात भैलःद्यःनं छागु स्वाँ ज्वना बुंगया हयंग्रिब भैलःद्यः यात छायतः यंकी । थ्व स्वाँ छाय् धुंका जक बुंगया जात्रा न्ह्याकीगु याइ । हान बुंगया हयंग्रिब भैलःद्यः स्वाँ ज्वना व हे चाःन्हे नवदुर्गा द्यः खल पाया वनेगु याइ । थःथें पाया वनेगु इलय् तलेजु भवानीया न्हयोने स्वना तःगु नलिःस्वाँ नं गुखें स्वत उखें हे पाया वनेगु याइ ।  पाया वं पिंन्त यलःया द्यःपालानं लसकुस याना पाया दिकी । थ्व दँय दँसं याय मागु चलन खः । अथें जुसाः निदँ स्वदँ न्ह्योस्य यलःया तलेजु भवानी क्वाहाँ बिमज्यागुलि थ्व चलन दिना वन । कने कुन्हु सुथे न्हापां द्यः खलः सुनाकोथी पाखें न्ह्याइ । अन थेंका ख्वापाः लं फिना गाँ चाःहिलेगु , पूजा फ्यगु व प्याखँ ल्हुईगु याई । थ्व हे दिं कुन्हुे थेच्वय् नं ख्वापाः लं फिना देय् चाःहिकेगु व पुजा फयगु याई । ब्रम्हायणी द्यःछें न्हयोने छलु प्याखँ ल्हुइका बां छम्ह बी । बां बिइगु ज्या सिधयका हाकन छक द्यक्व द्यःपिंत प्याखँ ल्हुइका प्याखँ क्वचायकेगु याई । 
कौलाथ्व त्रयोदशी कुन्हु झिँनिदँया मेलाया आगँ खः धका प्याखँ पिकायगु याई । थ्व दिंसं झिँनिदँय् छक प्याहाँ वईम्ह स्वेत भैरब प्याखँ नं ल्हुईकेगु याई ।थ्व दिं यात झिँनिदँ मेलाया छगु मुं दिं नं धाई । थ्व दिंया बन्हि पाखें द्यः हाकन यलःय् यंकी । कन्हे कुन्हु थेच्वय् तुं ल्याहा वइ । 
 
                         थ्व गँ प्याखँया भिंँनिदँ छक सुनाकोथी व थेच्वय् च्वपिंत छेखां छम्हेसित भ्वय् नकय्गु याई । थ्व भ्वय् नकी बले थेच्वय् च्वंपिन्त थेच्व वार्ड नं. ८ या दुरीखेलय् तया नकय्गु याई साः सुनाकोथी च्वंपिन्त थेच्व वार्ड नं. ६ या सरस्वती खेलय् तया नकय्गु याई । थ्व भ्वय नय धुंका भ्वय् नंवपिंस थम्हस्या फक्व वाः छायहेगु चलन दु । थ्व फुक्क ज्याः सिधय् धुंका झिँनिदँया फुक्क ज्याः क्वचागु जुई । 
थेच्वया थुगु द्यः गुथियात जात्रा न्हयाकेत थुगुसि निसे नेपाल मण्डलय् दुन दच्छि छक २५०००  (नि न्या दो) दाँ श्री ५ या सरकार पाखेँ ग्वाहालि बिइगु जुल धका न्यने दुगु दु ।
 
६. माली जातिं हनीगु नखः चखः
 
                      मालीं जाति थगु दुधंगु संस्कृति कथं दच्छियंक थी थी ऋतुया इलय् वलय् थी थी नखःचखः हना वया च्वंगु खनेदु । स्वनिगलया थीथ् िथासय् च्वनाच्वपिं मालीतयसं थथ थाँय्बाय् यागु थीथी नखःत हनेगु या । थीथी इलय् ब्यलय् हनीगु नखः चखः थकथं दु :—
 
गथांमुगः चःहे्र:-  गथांमुगः चःरे दिल्लागा चतुर्दशी कुन्हु बलि बियाः चःरे पूजा याना मानेयाइगु दक्ले न्हापांगु नखः खः । थ्व नखःनाप माली जाति पिनिगु तच्वंक्कं क्वातुगु स्वापु दु । थुगु नखः कुन्हु थीथी थासय् माली  तयसं ल्हुइगु द्यः प्याखँ निस्वनेगु ज्याः जुइ ।  
 
गँु पुन्हि :- थ्व नखः च्यान्हु तक मानेयाइ ।  गुंपुन्हि प्यन्हु न्हयो निसें म्वः ल्हुया नीसी याना क्वाति फोयेगु याइ । 
 
सायाः छवयेगुु :-  गुंपुन्हिया कन्हय्कुन्हुया पारुयात सापारु धाइ । थ्व दिने साः दानयातकि सिइपिं मनूत परलोक तरेजुइ धकाः सा दान याना मिजंमस्तयत साः याना दे चाःहिकेगु वा साया छोयेगु चलन दु । 
 
मां व अबुया ख्वाः स्वयेगु :- गथु तयसं माने यायेगु नखः चखः दथुइ चौलागा माताति चह्रे व गुँलागा आमाइ कुन्हु हनेगु अबुया ख्वाः स्वय्गु नं तःजिगु नखःत खः ।
 
चथाः :- माली जातिं हनिगु नखः खचः दुने यंलाथ्व चौथि कुन्हु हनिगु चथाः नं छगू खः । 
 
उपाकु वनेगु  :-   यंलाथ्व द्धादशी कुन्हु  सुथय् येँ हनुमान ध्वाखाः लागाय् यःसीं थनिगु याइ । थ्व हे बहःनि मे मे पिं नेवा जाति पिं थंै माली जातिपिं नं सीम्ह मनुया शान्तिया निंम्तिं उपाकु वनेगु धका पाल्चा व ल्हातय् धुं धुपाय च्याका देय् चाःहिलेगु चलन दु । 
 
येंया पुन्हि :- येंँया पुन्हि कुन्हु मालीतय्गु छें छें फुकस्यां सम्हयबजि नयेगु चलन दू । थ्व नखवलय् म्वःल्हुयाः सुचुपिचु यानाः बँ थिलाः, छेंय् सुचिकुचिय यायेगु नं चलन दू । थ्व नखःबलय् त्वाःत्वाः समय्बजि इना कायगु व इना बिइगु चलन दु । 
 
मोहनी :- कौलाथ्व पारु कुन्हु आगं आगमय् नःली स्वाँ पिना चालं तकं झिँन्हु यंक मोहनी हनेगु याइ । कौलाथ्य पारु निसें नवरथ मेला नं जुइ । नवरथबलय् थी थी तिर्थय् म्वः ल्हु वनिगु याइ । म्वः ल्हुइ धुंका थाँय थासय्यागु द्यः थाय पुजायाना मागु पिगंमय् समय दोँ छायगु नं याइ । येँय् यापिं नवरथ वने धका शंखमुल, लखतिर्थ, गोर्कण, कालमोचन, पचली, तोखादुभाँ, भजाखुसी, टेकुदुभाँ, गुहेश्वरी  आदि थासय् वनेगु याइ ।
 थ्व नखः हिन्दु नखः जुसाः स्वनिगलय् बौद्ध मालीतय्सं नं हनावयाच्वंगु दु ।  थ्व नखःचखः निन्हु स्वन्हु न्हयवं निसें छेंय् छखां बं थिलाः, वसःहियाः, म्वःल्हुया, लुसि ध्येना सुचुपिचु याना जक नखःचखः न्यायकेगु याइ । ख्वपय् च्वंपिं माली तय्सं नवमी कुन्हु खःमें ब्वाकाः ब्रम्हायणी पिगंमय् बां स्याइ । थ्व खःमें ब्वाककेगु ख्वपय् यागु तःधंगु हे जात्रा खः । अथें ब्वाके माम्ह खःमेंयातः नवदुर्गायागु द्यः छेंय् तया स्वालाः प्यलाः न्हयो निंसें लहिगु याइ ।  
 
स्वन्ति :-  गथुतय् तःजिगु नखः चखः मध्ये स्वन्ति छगु खः । थ्व नखःबलय् कोः पुुजा, खिचाः पुजा, लक्ष्मी पूजा, म्हपूजा व किजापुजा धकाः न्यानू माने याइ ।  स्वन्तियाः स्वन्हु गु दिं  कुन्हु लक्ष्मी पूजा धका लक्ष्मी द्यःयातः पूजा यायेगु चलन दू । थ्व दिन यातः गाई तिहार नं धाइ । 
 
लक्ष्मी पूजाया:- कन्हे कुन्हु म्हः पूजा यायेगु चलन दू । म्ह पूजा स्वन्ति नखःयाः न्यान्हु दथुइ मंू दिं खः । म्हःपुजाया कन्हे कुन्हु थः दाजु किजायातः तःता क्येपिंसं किजापुजा याइ । 
 
बाला चःह्रे :- कछलागा चतुर्दशी कुन्हु बाला चःह्रे नखः हनेगु याइ । बालाचःह्रेबलय् गुथि हनेमांपिं नं दु । आमाइ कुन्हु येंय् लुति अजिमा यागु जात्रा याइ । थ्व लुति अजिमाया जात्राबलय् लुति अजिया यागु पिगंमय् होम याइ बलय् चःखुं बःखुं नापं ताःहा छज्वनं होमय तयगु याइ ।  
 
किपुया जात्रा :- थिलाथ्व नवमि व दशमि कुन्हु पाँगा व किपुलि बैश्नवी व इन्द्रायणी जात्रा त हनी । बैश्नवि व इन्द्रायणी किपु पाँगाय् तच्वक्वं जाःगु द्यmया रुपं माने याइ । थ्व जात्रा बलय् उगुलागाय् भ्वय् नयगु याइ । सत्तिपिं थःथी थीपिंत पाहाँ हनेगु न याइ ।
 
यःमरि पुन्हि :-  गथु तयसं माने यानावया च्वंगु नखः मध्ये यःमरि पुन्हि नं छगू तःजिगू नखः खः ।
 
घ्यःचाकु सँल्हु :-  माली तयसं थी थी नखः चखः हना वयाच्वंगु दु । थ्व नखः मध्ये ध्यःचाकु सल्हु नं छगु तःजिगु नख  खः । थ्व नखः माघ संल्हु खुन्हु हनी ।
 
पाहाँ चह्रे :-  येँय् च्वंपिं माली जातिं चिल्लागा चह्रेकुन्हु पाहाँचह्रे धका थःथःगु लागाया अजिमा द्यः पुजा याना भ्वय् नया मानेयाइ । वहे दिंसं सनिलय् लुंमधि अजिमा, कँग अजिमा पिनिगु द्यःखःत द्यःछेँनं बाजं थाना जात्रा त्वात्वा चाहिका पिगँमय् द्यः ब्वय यंकिगु याइ । 
 
बिस्काः जात्रा :- चौलाथ्व षष्ठि कुन्हु ख्वपय् च्वंपिं बनमालापिंसं छन्हु न्हयोने यःसिं थना खाइसँल्हु बिस्काः जात्रा हनी । यःसिं खेलँनिसें द्यःखः साला तौमढी हयेगु याइ । बिस्काः जात्रा ख्वपय् तधंगु जात्रा व नखः खः। बिस्काःया कन्हे कुन्हु थिमी बालकुमारी जात्रा जुइ ।
 
सिथि नखः :-  तछलाथ्व षष्ठी कुन्हु हनीगु नखः यात सिथि नखः धका धाइ । थ्व नखः धुंकाः नखः चखः तः क्वचागु ल्याः जुइ । 
 
भलभल अस्टमि :- तछलागा अस्टमि कुन्हु माली गँ प्याखँ कोचालिगु जुइ । झिंनिदँय् छक प्याहाँ वइगु गँ प्याखँ त न उकुन्हुहे कोचायकेगु याइ । प्याखँ कोचायेका द्यः ख्वापा फुक्व थैच्वय् वाहेक मेमेथाय् छोयका छोइ ।

७. माली जातिया सामाजिक विधिब्यबहार:-
 
धौबजि नकेगु :- गथु समुदाय दुने थः म्ह्याय्मचायातः धौःबजि नकेगु संस्कार नं न्हयाका वया च्वंगु दु । गुलिसिनं म्ह्याय्मचा थःछेंय् वइ बलय् धौ, ला, जा, यःमरि आदि तयाः नकेगु याना च्वंगु दुसा, गुलिस्या  जिलाजंया छें वना धौ, मरि, ला, फलफुल दक्व जोरजाम यानाः छेंया परिवार दक्वसितः नका  वयेगु चलन दू । थ्व संस्कार म्हयाय्मस्तयगु स्वाथ्यया नितिं झि आजु अजिपिंसं दयेका तःगु बांलागु थिति खः । 
थःछेंय् वयाच्वनी बलय् म्हयाय् याकः चित जक नकाः छ्वयेव गाःसाः, जिलाजंया छेंय् वनेबलय् दक्वसित नके मागु खनेदु । तर थ्व ज्या च्याला फुनां गुला दैबलय् वा मचा बुइन्ह्यो नकेगु याइ । थुगु इलय् निसेंं म्हयाय्मचा  थःछें चाःहीगु याइमखु । यदि छुं गुं जुया थःछें मचा बुल धाःसा तस्सकं दशां मभिगु कथं कायेगु याइ । यदि छुं गथे थःछें लाना च्वंम्ह मिसा जूसां नं मचा बुइगु इलय् मेगु छें यंका मचा बुइकेगु याइ । थ्व पुलाँगु संस्कार खः । 

सिचु पालु क्यनेगु :-  गथु जाति दुने सुन म्ह्याय्मचाया मचा बुल धासाः थःछें खलः यातः सुचं बिइकथं सिचुपालु क्यंने छोयगु चलन दू । यदि काय्मचा बुलः धाःसाः थःछेंय् खलःयात घ्यः जिफ्वः चाकु,ग्वय् छग्वः तया  क्यने यंकेगु याइसाः, म्हयाय्मचा बुसाः दक्व बच्छि, बच्छि तयाः क्यने छ्वयेगु याइ । थ्व सिचुपालु छ्वयेगु सामान थाय कथं पाना च्वंगु खनेदु । गुलिसिया इमू, सिन्हः आदि तगु नं याः । न्हयागु हे जूसां, न्हयाथे हे सामान छ्वःसां सिचुपालु क्यनेगुया अर्थ थःछेंय् खलःयातः मिसाया मचा बुगुया सुचं बिइगु खः । न्हापा न्हापा संचारया विकास मजुबले सुचंया रुपं सिचुपालु क्यंने छोयगु चलन न्ह्याका तःगु खनेदु । 

घ्यःबजि नकेगु :-  मचाबू ब्यंके न्ह्यो थःछें खलः नं घ्यःबजि नकः वनेगु धकाः घ्यःचाकु, बजि आदि जहान् स्वया तयाः यंकेगु याइ । थ्व घ्यःबजि नकेगु नं थाय थासय् पाना च्वंगु खनेदु । थ्व चलन गथु जातया दुने नं गुलीसिया नक वनेमागु, अले गुसिया नक वने म्वाःगु खनेदु । तर थौःकन्हय् थेच्व व में मेंगु गाँ गाँमेय् च्वंपिं माली तय् सिचुपालु क्यने व घ्यःबजि नकेगु चलन म्वाःगु खनेदु । 

ब्यंकेया मूं दिं :- गथु जाति दुने मचाबू ब्यंकेगु चलन फुक्वसियां दु । थःथें मचाबुं ब्यंकेगु ज्या फुक्व थासय् यासां किपु, ख्वप, यलः, येंय् व गाँ गाँमें उकेयागु तजिलजि भतिभति पाना च्वंगु खनेदु । अप्वः सियां मचाबुगु प्यन्हु वा खुन्हु दुखुन्हु ब्यंकेगु याइ । तर छुं जुयाः आपतविपत वैगु अवस्थाय् मचाबुयाः कन्हे खुन्हु नं ब्यंकूगु खनेदु । थःथे कन्हे खुन्हु हे ब्यंकेगुयात ओहलाछि ब्यंकेगु धकाः धाइ । गुलिसियां जोर दिनय् खुन्हु झिंन्हु, झिंनिन्हु दुखुन्हु नं मचाबु ब्यंकेगु यानाच्वंगु दु । मचाबु ब्यंकेगु इलय् गथु जाति दुने दिदि अजिया तस्सकं महत्व दु । दिदि अजिं मचा तःधी मजुतले सुसाकुसा आदि यायमाःगु ज्या याइ । मचा यात चिकं बुइकेगु, मचायात म्वःल्ुहइकेगु  ज्या याइ ।  ब्यंकेया मूं दिंसंं दिदि अजिं न्हापां छ्वासय अजियात पूजा आजा याइ । वयां लिपा जोरजाम याय धुंकाः हासाय् तयाः आगं धकाः पिने च्वंपि, मस्तय्त पिखालखुइ च्वना इनेगु याइ । ब्यंकेगुया अर्थ शुद्ध यायेगु खः । अथे जुया थुकुन्हु छें निसी यायेगु, मचाबुम्ह व मचायातः म्वःल्हुकेगु, मचाबुम्ह छ्यला च्वंगु खुकू छ्वयेकेगु फोहर वांयेगु  याइ ।
मचाः ब्यंकेबलय् थःछेंयपाखें मचायात माःगु लासा, फांगा, सुकू वसः मचाकथि, घ्यःचाकु, चिकं, अजः आदि ज्वलं फुक्व ज्वना कु यंकेगु याइ । थ्व यंकीबलय् मचायात माःगु ज्वलं दक्वसियां उत्थे खः । थ्व दिने मचायात घ्य कस्ति तयाः चिपं थीकेगु याइ ।

नां छुयगु :-  माली जाति दुने मचा बुइवं नां तयेगु चलन फुक्क थासय् नं दू । तर गुलिसियां बुइसातं तइ गुलिसियां लिपा तयेगु याइ । तर थ्व जाति दुने थःथे नां तयेबलय् मचाया जातः व मचा तयाः पुजा याना विधि कथं नां तयेगु चलन दू । थौकन्हय् थःथे विधि कथं नां तयेगु चलन मदया वंगु दू ।
मचाया नां तय्बलय् माली जाति दुने काय् बूसाः पाजु व म्हयाय् बूसाः निनि पाखें नां तयेमाः धैगु धारणा दु । मचायात नां तयेबलय् पूजा याना ताःचा ज्वंकाः लसकुस याना द्यःया न्हयोने फयेतुका सलिंखय् ईका पःका तया मि छ्वयेका पिखालखुसं वाय् यंकेगु याइ ।  थःथे ईका पःका सलिंखय् छ्वयेकेगुया अर्थ माली जाति दुने भूतप्रेत पाखें सुरक्षित जुयाः च्वंनेगु तातुना खः । पूजा सिधयेवं छेंया नकिं नं कायजूसा जव न्ह्यपनय्,म्हयाय्म्ह जूसा खव न्हायपनय् बनाः मचाया नां कनेगु याइ । थःथें नां तय्बलय् न्हापाः जूसा नक्षत्रया आधारय् नां तयगु याइ । थ्व संस्कार माली समुदाय दुने तना वने धुंकूगु खनेदु । तर थौंकन्हे थःथे नक्षत्रया आधारय् मजुसे मां बौया नां क्वकया तयेगु चलन खनेदु ।  थौं कन्हे न्हापाःथें मन्त्र ब्वना नां तयेगु परम्परा त्वताःथःपिन्त यगु नां जुइवं छुनं दिं न्ह्यागु दिंसां  नां तयेगु याइ । 

मचाबू स्वः वनेगु :-  माली जाति दथुइ मचाबुयाः लच्छिया दुने थथगु छेंनं नसा ज्वलं ज्वरे यानाः सकल जहान्यात चिपं थीकेगु याइ । थःथें वनेगु यातः गाँगाँमे लाः नकः वनेगु नं धाइ । थुगु इलय्  दिदि अजियात नं ब्वः तया नकेगु चलन दु । मचाबू स्वःवनेगु इलय् दक्व परिवारयात चिपं थीकाः वयेगु अले थःन नया वयगु याइ । थौं कन्हे थ्व जातया दुने नं गुलिसिया मचाबू स्वःवनेगु कुन्हु हे दक्षिणा नं छायेगु यासा गुलि स्यां न्हापा हे दक्षिणा छायेगु याइ । 

मचाबू लहीकेगु :-  मचाबूया लच्छि, दयेवं दिदि अजिं मचायात म्वःल्ुहकी, मांम्हेसिया नं म्वःल्हुइ अबलय् तिनि व शुद्ध जूगु ल्याखं भुतुली वनेजी, लःचलय् जुइ धका धाइ । मचायातः म्वःमल्हुकुसे लहीकः वनेगु याइमखु । लहिकः वनेगु धकाः ब्यंके धुंकाः न्हयाबलय् वंसां ज्यू अप्वःसिया लच्छि धुंकाः हे लहीकः वनेगु याइ । मचाबूम्ह कावनेत मांम्ह हे वनी । उगु इलय् दिदि अजिं थःछेंया पिखा लखुइ च्वकि ह्वला मचायात लुखा भागीःयाका दुत यंकी । अवलय् दिदि अजिं ज्या याःगु बापतय् नकाः छ्वयेगु व लं छपा बिया छ्वयेगु याइ । थुकथं म्हाययात लच्छितक थःछें तयेगु याइ ।
लच्छि लिप्पा निखलःसिया  सहलह याना ससःमां नं भौयात थःछें वया का वइ । थःछेंय् पाखे नं म्हय्याय् व मचायात वसः पुंकाः छ्वयेगु याइ । 

मचा जंक्व :- माली जाति दुने मचाबुयाः न्यालानिसें च्यालाया दुने याइगु मचा जंक्व नं छगू तःजिगु संस्कार खः । मिसामचा जूसा न्याला वा न्हय्ला जोमलागु लाय् मचायात जाःनकेगु, अले मिजंमचा जूसा खुला वा च्यालाय् यायेगु याइ । थ्व मचायात जा नकेगु संस्कार स्वया न्हयो नं फलप्राशन धकाः मचायात सिसाबुसा नकेगु चलन दू । आःवयाः मालीतय् दुने फलप्राशन व अन्नप्राशन निगुलिंं छक्वलं हे याना वयाच्वंगु खनेदु । अन्नप्राशन याइखुन्हु मचायात न्हापां खीरजा नकेन्हयो सीसाबुसाया  रस त्वंकेगु  व कुचा थलाः नकेगु याइ । 
मचाः जंक्वया दिंसं थःछें खलः नं मचायात व मचाया मां अबुपिन्त नं वसः हयेगु याइ । थ्व दिंसं मचायात पाजुं बुयाः गणेद्यः क्यनेगु याइ । अले निनिम्हः द्यः पूजा याइ । थनं लिपा छेय्ं हयाः न्हयब्वसा ल्ययेकेगु व ख्यें सगं बिइगु ज्या जुइ । थ्व दिंसं मचायातः वःयागु  डबल दां वा असर्फीं तुयाः जाःनकी । गुलिसियां थुगु दिंकुन्हु थगु आर्थिक अवस्था स्वया तिसा तिइकेगु नं याइ । 
गन गन मचा जंक्व बलय् कलश पुजः मयासें छें जहान च्वना याइपिनि दु । गणेद्यःया थासय् वना लड्डु लानां नकेगु नं याइ । मचा जंक्वया कन्हे खुन्हु कथुप्वाः चायेकेगु धकाः गणेद्यःया थाय् मचायात यंका गोःजाः लाना नकेगु चलन नं मदुगु मखु । थ्व संस्कारतः थःम्ह पूmचाःकथं न्हयाकाः वया च्वंगु खनेदु । थःथें मचायातः जानके बलय् थःछेंय् खलनं कु हयेगु यायेमाः । थ्व कु न्हापांम्ह मचा छम्हेसित जक हयाः च्वंगु खनेदु ।

निदँ बुदिं :-  मचाबुयाः निदँ दुसांनिसें बुदंया ज्या विशेष रुपं न्हयाकेगु यानाच्वंगु खनेदु । मचा निदँ दयेवं हामा चाकुे दुने तयाः यःमरि दयेकाः पूजा यायेगु याइसा निदँ दुगुया लसताय् पाजुपिन्त निनिपिन्त यःमरि इना विइगु यासा पाजुं मचायात वसः बिइगु याइ । थ्व चलन गथु समाजय दुने नं गुलिसिया याःगु खनेदुसा गुलिसियां यानाच्वंगु खनेमदु ।  बुंदिं कुन्हु सुथ न्हापां गणेद्यः, पीग,ँ दुगद्यः आदि पूजा वनी । दच्छियकं जीवनय् भिं जुइमाः धकाः थी थी कथं ख्यें संग वियाः जन्मन्हि याइ । बुंदिं यायेबलय् गणेद्यः पूज्याय् न्हयः पिखालुखाय् क्षेत्रपाल यात न्हापाँ पूज्याय्माः । तर नखःचखः बलय् थें छें छखां सूचिनिचि याय्म्वाः । जन्मन्हियाइम्ह व याका च्वनिम्ह निम्हसिया जक सुचिनिचि याःसा गाः ।
थथेंहे प्यँदया प्यंग, झिंनिदँया झिंनिगः यःमरियामाः दयेकाः क्वखायेकेगु यानाच्वंगु दु । गुलिसियां थ्व चलन न्हापांम्ह काय् व म्ह्याययात जक याःगु खनेदु । थुगु दिंसं पाजु खलः नं मचाया अबु मां पिन्त तक नं वसः बिइगु यानाच्वंगु दु । निदँ बुद्धिंबलय् गुलिसियां थी थी ल्या कथं १०८, नीगः, स्वीगः, नीप्यंगः यःमरि पाजुपिन्त बिइगु यानाच्वंगु खनेदु । थथे जन्मन्हिंया भिँंनिदँ तक यःमरि क्वखायेकेगु चलन न्हयाकातगु खनेदु ।  गुलिसियां निदँ बुदिंबलय् थथे पाजुपिंथाय् यःमरि बिइके छ्वःगु चलन मदु साः, गुलिसियां यःमरि नाप सिसाबुसा नं तयाः छ्वःगु खनेदु । अथेहे तःता तहकेहें पिंथाय् नं. बिके छ्वःय्गु चलन दु । थुकथं यःमरि क्वखायेकाः बुंदिं हनेगु व  पुरोहित तयाः पूजा याना थःम्ह फुथे दान याइगु चलनं खनेदु । थथें बुंदिं हनकी मचाया ग्रह दसा शान्ति जुइ,  दशा फालाः वनी भिंगु बांलागु ज्याये पलाः तयेपैm, न्हयागु ज्याय नं सुथाँलाइ धैगु भलसा काइ । थुगु कथं निदँ दुसांनिसें झिंनदितकं यः मरी क्वखायेकाः बुंदिं हना वया च्वंगु खनेदु । 
 बुँदिं हनिबलय् न्हापा लाक्क गणेद्यःया रुपं सुकुन्दायः पूजायाइ अले न्हयःने तयातःगु लप्तेय् स्वप्ता वा न्याप्ता सिन्हः तिकाः द्यःपूज्याइ । द्यः पूजायय् सिधलकि बुँदिं हनिम्येसित सिन्हः तिकाःपूजा यानाः ख्येंसगं,,मरिचरि नापँ धौबजि हामो सिसाबुसा आदि तया बांलाक केगु चलन नं दु । गन गन भिंmनिदँतक भिंपू माः, यःमरि माःं क्वखायेके माः धका नं धाइ । बुँदिं सिद्यलकि पूज्यानातःगु लप्तेया पल्तीयाना धलिमय् सोचाकेगु पुलाँगु रित खः । बुँदिं सिधलकी त्वाबायापिं मचातय्त धौबजि, यःमरि, लोंचामरि, धिवा, सिसाबुसा आदि तयाः इना बिइ ।
निर्बुन्हि जुया निगः जक योमरि व निगः भिंपू तयाः योमरी माः दयेका कोेखायकी, अले पाजुपिंसं नं निर्बुन्हि कु व्छोया हयेमाः। अथे कु व्छोया हइबलय् पुजाभः नापं धौ सगं ज्वलं, लँ ज्वलँ आदि तया बालाक्क तःजिक छोइगु नं या ।  

बुसँ खायगु :- काय्मचा बुया स्वदंनिसें गुदं दुने बुसं खाकेगु चलन दु । बुसंखाकेधुंकातिनि कय्तापुजा याइ । थौकन्हय् थ्व चलन मधयेधुंकल । 

कय्ता पूजा :- माली समाजय दुने काय्मचायात न्हयदँ निसें झिंनिदँतकया दुने कय्ता पूजा धकाः कय्ता लःल्हायेगुु याइ । 
गाँगाँमे  कय्तापूजा खुन्हु पाजु वा पाजु मदुसाः निनि पाजुयात छ्वयेलाभु याकेगु याइ । कय्तापुजा दिंसं मचायात पाजुं आंग्सा ल्यंकाः लुँया अंगू आंग्साय् तयाः सँ खाये भाय् याइ अनंलि ल्हाःपुजा बियाः आँग्सा जक ल्यकं सुचुक सँ खाइ । निनिम्ह थाय्भुइ लं तयाः लनय् द्योने सँ फयेगु याइ । व सँ निनिम्ह न्हया ल खय चुइका छ्वयगु याइ ।  
गुलि गुलिस्यां थ्व दिंकुन्हु गणेद्यःयाथाय् वना पुजा यानाः ग्वयपला छिकेगु धकाः ग्वाःपाःग्वय्लवं, जाकि, तया न्हय्पलाः छिःका, पाजुं लानां देसाःचाः हिके यंकी । यदि पाजुं लानांमकाःसे मेपिन्सं लानाः काःसा वा मचा बिस्युं वंसा धेबा पुलाः फ्यानां कायेगु याइ । चाःहिले धुंकाः पिखालखुसं फँबारां धकाः दाँ तयाः थीकाः दुकयाः हइ । पाजु निनिं नापं थःथिथिपिंसंं, वसः तपुलि बिया सिन्हः तिकेग,ु दक्षिणा बिया ख्यें सगं बिइगु याइ । 

इहि :- माली मिसामचापिंत प्यदँ निसें न्हयँदँया दुने इहि छुइगु ज्या जुइ । थःपिसं इहि याके बलय् आपाःलं खर्च जुइगुलिं माली जाति नं गुिलस्यां  मंका कथं इहि मुंकुगुु थासय् यंका इहि यायेगु चलन दु । 
 
बाह्रा तयेगु :-  माली जाति दुने मिसामचायात गुदँ निसें भिंmस्वदँ तकया दुने झिंनिन्हुतक्क सूद्यर्ःया जतिं व सुँ मिजंया किचः तक नं मखंक कोथा बिया तइगुयात बाह«ा तयेगु धकाः धाइ । थ्व ज्या फुक्क जातया नापं ज्वःलाःगु खनेदु । थ्व संस्कार रजस्वला जुइन्हयो याइगु संस्कार खः । थ्व संस्कार न्हापाँ गथु समाजय दुने रजस्वला जुइबलय् हे काचाक्क मिसामचायात बाह्रा कोथाय कुनेगु याना वयाच्वंगु खः । तर थथे जुइबलय् अबोध मिसामस्तयगु मनय् बाँमलागु लिच्वः लाना ग्यायफुगु व ग्यानाच्वंगु यात बिचाः यानाः लिपा तिनि साइत स्वयाः थीमज्यु जुइ न्हयोहे बाह्रा छुइगु यानाः हगु धाका आजु अजिपिन्सं धागु न्यने दु ।
बाह्रा तैगु दिसं सलिंखय् जाकि, ग्वय् धेबा तयाः किसलिं तइ । मनूया बांकि वयकः कपाय्याम्हः ख्याः दयेका गखुंप्वाले  ख्याः व सलिं पलिस्था याना तइ । अन बाह«ा तःपिं मस्तय्त सगँ बियाः, धौबजि नकाः, सिन्हः तिकाः बाह्रा क्वथाय् दुछ्वइ । प्यन्हु तक चिस्वा भ्या मनकूसे कुनां तइ । उगू इलय् सुद्र्यःया जः व मिंजंया ख्वाः स्वयमज्यु धका धाइ । बाह«ा कोथाय् बाह«ापासा धकाः छम्ह मिसामचा नं तइ । बाह्रा तैगु भिंmनिन्हु तक कोथाय्तुं म्हितेगु नयगुु याइ । प्यन्हु दुखुन्हु खौभ्याःकं ख्वाः सिका क्वलंः बुइकी । क्वलंः बुले न्हयो ख्याः द्यःःयातः क्वलंः छाइगु याइ । थ्व दिंसं ंंनिसें चिभ्याः नकेगु नं याइ ।
बाह्रा च्वंगु झिछन्हुया चान्हय् मस्तय्त लं त्वकाः म्वःल्हुइका  वसः हीकी । थ्व वस हिबलय् मांपिन्सं ह्यूसां नं सुनान मखंक हीमा धैगु धापू दू । 
झिनिन्हु दुखुन्हु सुथय् वाताय् लःतयाः किसलीं व धेबा छानां सूद्र्यःया जः लखय् न्हापालाक स्वयाः तिनि सूद्र्यःयात च्वये स्वकेगु याइ । अले पिगँमय्, दुगुद्यः नाप मे मे पिं द्यःपिं चाहीके यंकी । 
भिंmस्वन्हुया दिंनय् बाह«ा च्वपिं मस्त व बाह«ापासाः वना खुसी ख्याःद्यः नापं जाकि स्वां धेबा छानाः तःगु फुक्क चुइकेगु याइसा खुसी ल्याहाँ वयेधुनेवं ख्याः ब्वं धकाः ख्याःयात तयातःगु ब्वः नापं छुस्या मुस्या इनां नयेगु याइ । गुलिसिया प्यता धासा तयाः भ्वय् हे नइ ।
थ्व बाह«ा तैबलय् निनिपाजुं,ः थिथिपिंस कोथाय् म्हाइपुइ धकाः छुस्या मुस्या नकः वय्गु चलन दू । छुस्या मुस्या नकः वइपिंत प्यता धासा खाना चिपं थिका छ्वयमाः । यदि बाह्रा तःगु भिंmनिन्हुया दुने बाह्रामस्त सित धाःसाः मचायात पित मयंसे गनं सीगु खः अन हे गाः म्हुयाः ल्हाकेमाः धैगु न्यने दु । थ्व चलन आतक नं न्ह्याना वयाच्वंगु दु । तर थौकन्हय् थथे बाह्रा तःपिं मस्त गनं सीत धाका धागु न्यने मदु । थौंकन्हे बाह्रा छुयाबलय् ग्यानापुक्क म्हसुख मदुसा, बाह्रा छुइगु ज्या  दिका मचा यात वासः यायगु याना हय धुंकुगु खने दु ।
न्हापा न्हापा मचाबलय्हे इहिपा याना छोयगु चलन दुबलय् मिसामस्त बाह्रा तहे मतःसे बियाः छ्वेगु नं याः । अजागु अवस्थाय इहिपा जूसां मिसा व मिजंयात छकू हे कोथा मब्युसे बायका थ्यनेगु याइ । बाह्रा तये सिधयका तिनि भाःत व मिसाःयात छकु हे कोथा विइगु याइ । बाह्रा मतसें इहिपा याम्ह मिसामचायात भाःतयात छें तयाः बाह्रा तयगु चलन दु । थुकथं स्वयेबलय् बाह«ा धैगु जीवने यौन शिक्षा बिइगु व इहिपा या ई जुल धाका सूचं बिइगू संस्कार कथं न्ह्याका तःगु खनेदु ।  ।

ईहिपा :-  माली जाति दुने इहिपा यायत मिजंया खलः पिन्सं मिसाया खलःपाखे धायेके छोयगु व मिसा व मिजं दथ्वी यःत्यः जुया याइगु इहिपा खनेदु । यःत्यः याना जुइगु इहिपा यायत विधि व्यवहार कथं छुं नं याना च्वनेम्वाः । तर लमि तयाः छेँया खलः पाखेँ  धायेका यायेगु  इहिपायात धासा विधि फुकं पूवंका यायेमा ।
मिजं वयस्क जुयाः वय्वं छेंया हामा पिन्सं  ल्वम्हः मिसा माला मिसाया छेंय् लमि तयाः धायके छ्वइ । थ्व लमियात छ्वयाः खँ ल्हाकेगु पायछि दिं कथं बिहिबारयात कया तःगु खनेदु । निकः स्वकः लमि वना खँ मिलय् जुलधाःसाः मिजं व मिसा दथुइ छगू थासय् वना वा मिसाया छें वनाः म्ह स्वकेगु नं चलन वःगु दु । म्ह स्वयाः चित्त बुझे जूसा बिहिबार खुन्हु हे लमि कोचिनी वा साखः बियाः हयेगु याइ । मिसा व मिजंया जातः ज्योतिषया थाय् क्यनाःराशि नक्षत्र स्वयाः मिले जूसा ईहिपा  यायेगु साइत नं च्वयाः वियाः है ।

ग्वय् बीगु :- जातलं त्वय्वं भिंगु वार धकाः आपाः याना बिहिबारखुन्हु ग्वय् बिइगु याइ । ग्वय् बिइबलय् ग्वय् झिगः,ह्याउँ सिन्ह नापँ थौकन्हे चलय् जुकथं थी थी् मरिचरि , सिसाबुसा, तिसावसः आदि ब्वया छोयगु याना च्वंगु खनेदु । गाँ गाँमे ग्वय छोइ बलय् थौंकन्हे नं अपासं भ्वासि जुउगु खने मदुनि । गाँमे ग्वय छोयत झिगः ग्वय, लँ छपा दाँ छर्काः तयाः लमिं बिइ धुनेवं व म्हयाय्मचा मिजं स्वापु दुगु जुइ । ग्वय् बिइ धुनेव मिसा सित धाःसा मिजंया पाखें फुक्क अन्त्येष्टिया ज्या याइ । यदि मिजं सितधाःसाः मिसां नं भाःत कथं नालाः मागु ज्या याइ । ग्वय् बिइ धुनेवं मिसां चूरा, ग्वय्, नैक्याः, फसि आदि तःछ्याय् मज्यू  धका धाइगु न्यनेदु ।

लाखा कायेगु :-  लमिया माध्यमं म्हयाय्मचा पाखे.प्mवना ज्या कोचिगु याःबलय् जुगुु खँ कथं लाखा कायेगे धकाः मरि लाखा, धेबा लाखा, लुँ आदि कायेगु याइ । लाखा काय्गुया दुखँ मिसा पक्का यायगु धकाः धाइ । यदि मिसा व मिजं निम्हय् छेँयन राजिखुशी जुया ईहिपा जुलधासा मिसा पाखें थःथिति, फुकी, पासापिं दक्वसितन भ्वय नकेगु याइ । थ्व भ्वय् नयत कोसा तयमा । यदि मिजंया पाखें जुसा दाँ तया ग्वय्काः भ्वय् यायेगु चलन नं दु । 

स्वयंम्बर :- ग्वय् बियाः पक्का जुइ धुनेवं गुलिसियां न्हापालाक स्वयंबर नं  यायगु चलन दु । यदि ईहिपा यायत छुं नं छेंया अवस्था पाय्छि मजूनिसा, साइत दयाः नं धेवा मदुसा, व में में थी थी कारण याना पनीगु जूसा वा नापं हे भ्वय याये माःगु अवस्था दैबलय् मिसा व मिजं दथ्वी पुजा आजायाना, स्वँंमाः, हिलाबला यायेगु यातः हे स्वयंबर धकाः धाइ । स्वयंम्बर यायत स्वयंबरया साइत कथं मिसाया छें मिजं व मिजंया मां अबु व थःथितिपिं वयेगु  याइ । 
माली जाति दुने ईहिपा याइबलय् मिसा काःवनेतः मिजं वनेम्वाः । भम्चा कावनी बलय् मिसायात थाय्भूइ तया चिपं थिइकेगु चिपंथिकेवं थाय् कलः गालय् वाययंकी । अनंलि मिजंया पाखेंजन्ति वयाः काःवइ । जन्ति वःपिन्त मिसायात छेंयनं मसला इना बिइगु वा भ्वय् हे नकेगु चलन दु । जन्ति नाप मिसायात दुनिकाय वा पंकी तया जन्तिखलः नापं मिजंया छेंय् हइ । थौंकन्हे दुनीकाय व पन्की मदूयाः टयाक्सी तयाः यंकेगु चलन दु । भम्चा हखुन्हु वा उया लिपा पायछि दिंसं मिजंया छेंये थःथिथि, फुकी, पासापिं व मांःमांपिंत  दाँछि भ्वय् नकेगु धका भ्वय नकेगु चलन दू । 

पयनं जाः नकेगु :- ईहिपा जुइत्योम्ह  म्ह्याय्मचायात पाजु निनिपिं थाय् पयनं जाः नकेगु धका सतेगु चलन दु । बिया छ्वइम्ह मचायात सुकुदा च्याका सगं बी, नापं वःस छजु नंं लः ल्हायेगु याइ ।  अले कौला याका पयनं जाः नकेगु याइ । तसकं स्याम्ह निनिथाय् ईहिपा भ्वय् कुन्हु सुथय् पयनं जाः नकेगु चलन दु । 

ग्वय् सालेगु :- बिया छ्वइम्ह म्हयाय्मचाया थःगु छँे जःफुकस्यां ग्वय् सालेगु धका थः म्हयाय्मचया  ल्हातं ग्वय् फया कायेगु याइ । थःथे ग्वय् सालेबलय् मां बौ नं दकले लिपाः ग्वय् फयेगु याइ । मां बौ नं ग्वय् फयेगु ज्या क्वचायवं म्ह्याय्मचायात बिदा बीगु ज्या जुइ ।  

लसकुस :- म्हयायमचायात पित बिया छ्वय्वं जन्त नाप भम्चा ज्वना वनि । भम्चाया छेँ नं प्याहाँ वना उगु छेँया गणेद्यः वा दुवातय्  मिजं व मिसा निगु पक्षया गुरुजुपिं नापं च्वना खँ ल्हाःना जन्ति खलः बाया वनेगु याइ ।  थ्व खँ ल्हाःयगु ज्या क्वचाय्वं भम्चा नापं जन्ति मिजंया छेँ वनी । छेँ थेंनेवं भम्चा यात पिखालखुइ तया थाकुली नकीनं व छेँ हनेमापिं  मिसापिं च्वना तुती सीकाः फंत्वया  सिफंलुया सिन्हं तिकाः लसकुस याइ । थ्व ज्या क्व चायवं भम्चा यात ताःचा प्वायँ ल्हातय ज्वना छेँ दुचायकी । 

ह्वँके :- भम्चा यात लसकुस याना ताःचा ज्वका हये धुसेंलि थःकाय् मचा नापं फेतुका ग्वय् सालेगु ज्या जुइ । थ्व ग्वय् सालीगु धाइगु खलः या दुजपिं नाप म्हसिकेगु खः । अले सगं कायेगु ज्या नं जुइ । निम्ह त्यपु यात नापं तया छपाहे थायभुइ भ्वय् तया नापं नकेगु ज्या जुइ । 

व्ांजला वनेगु :-  ईहिपा यागु ज्याझ्व सिधय् धुंका योगिनी द्यmयाथाय् वंजला वनेगु धका ईहिपा यापिं कायमचा भौमचा निम्ह ज्वना खलपिं द्यःकी वनेगु चलन दु ।  थःथें वंजला पुजा वनेबलय् कायमचाया ल्हाःतं भौमचा यात स्वकः तक सिंचा छायका सिंन्हं नं तिके बी । थ्व ज्या क्वचायवं सिंन्हं मुं भौमचायात लःल्हाना बी । थुलि ज्या क्वचायवं पुजा वंपिं खलः फुकस्यां चिपं थीगु ज्या जुइ । थःथें वंजला वनेगु ज्या आपाः याना मुं भ्वय्या कन्हे कुन्हु वनेगु याइ । 

ख्वाः स्वःवनाकथं जिलाजं दुचायेकेगु :- थःछेँ खलनापं म्हयाय् मचा थल्ःछेँ लिहाँ वइ । ख्वाः स्वयेत यंकुगु वसः पुना वयेगु याइ । जिलाजं दुचायेकेगुया लागि धया वइ । छु ई लिपा जिलाजं छम्ह पासा ब्वना सःसःलय् वनी । जिलाजं खालि ल्हातं वनी मखु मसला प्व, ग्वाः व अयंथा मह् िझिंनिताः ज्वना वनी । अन जिलाजं पाखें ग्वय् सालीगु ज्या जुइ । ग्वय् सालेबलय् खाली ल्हाःतं काइ मखु दाँ बिइमा । ग्वय् कायेगु धैगु हे जिलाजं नापं परिचय यायेगु खः । जिलाजं यात सगं नापं वसः तपुलि लाकां तक नं बी मा । थःथे बिइगु दक्व थासय नं मागु खनेमदु । थःथे यायेबलय् जिलाजंयात भ्वय् नं नकेमाः । 

ख्वाःस्व वनेगु :- म्हयाय्मचा बिदा बीया छ्वया प्यन्हु दु कुन्हु ख्वाः स्व वनेगु याइ । मिसाया पाखें छेँया जः,फुकिपिं, थःथिति, जःला खःला, इस्तमित्र, पासापिं आदि सःताः इमित नकाः क्वतः ज्वलं  तिसा वसः सिसाबुसा थी थी  मरिचरि ज्वना म्हयाय्मचाया छेँ ख्वाः स्व वनेगु धका म्हयाय्मचा बिया छ्वया धुंका नापं लाः वनेगु ज्या याइ । थथे ख्वाः स्व वनेबलय् ख्वाःस्व वं पिंसं म्हयाय्मचा यात दाँ छाना ख्वाः स्वयेगु याइ । ख्वाः स्वयेत वपिं पाहाँ पिन्त म्हयाय्मचया छेँ पाखेँ चिपं थिकेगु, मोसी प्व बीगु नं याइ ।  

ज्याथं जंक्व :-  सुं नं. मनु बुढा वा बुढि जुइधुंकाः न्हय्न्हय्दँ, न्हय्ला व न्हयन्हु दुखुन्हु विधि कथं याइगु ज्यायात हे ज्याथं जंक्व धका धाइ । थुगु दिंसं बुढाबुढियात रथय् तया देशाः चाहिकेगु व द्यः दर्शन याकेगु  याइ । माली जाति दुने नं थ्वः थाय् स्वयाः सालेगु वा कुबीगु नितां याना च्वंगु खने दु । थुगु इलय् छय्पिन्सं कुबियाः वा साला यंकेमाः धैगु न्यनेदु । 
निक्वगु ज्याथं जंक्व यायत चय्प्यदँ, प्यला व प्यन्हुया दिंसं याइ । थ्व निक्वःगु जंक्व बलय्. बुढाबुढियात बसुन्धरा मण्डल दर्शन याकाः अष्ट सिद्धि कामना याइ । स्वक्वःगु जंक्व धकाः चय्च्यादँ च्याला व च्यान्हु दयेका यायगु याइ । थ्व स्वक्वःगु जंक्वयात देव रथारोहण व महारथारोहण नं धायेगु याः । थ्व स्वःक्वःगु जंक्व याये व मनू देव तुल्य जुइ धैइगु धापु न्यने दु । अथें जुयाः थुगु इलय् जंक्व याःम्हेसित काय् म्हयापिन्सं क्वबुया, रथय् तयाः देय् चाःहुइकाः झ्यालं थकायेगु याइ । थुगु ई तक म्वानां च्वपिं मनूतयतः न्हुगु क्वंचाय् तयाः क्वःं तःछ्याना गथे मचा बुइकीगु खः अथेहे यायमा धका धाइ  । थ्व धैगु पुनर्जन्म खः धका धाइ । 
ज्याथं जंक्व धकाः न्याक्वःतक यायेगु याइ धका धयाःतःगु दु । जंक्व यायेगु यातः माली जाति दुने  द्यःया पलिसामि कथं कयाः तःगु दु । थःथँे स्वक्वःतक जंक्व याइगु इलय ब्यलय् झीसं स्वयाः च्वनागु दु । तर प्यक्वःगु व न्याक्वःगु जंक्व याइ धैगु न्यनां जकं तयागु दु । यदि प्वक्वःगु जंक्व यायेमाल धाःसा गुइगुदँ, गुला व गुन्हु दुखुन्हु यायेगु याइसा, न्याक्वःगु जंक्व सच्छि व च्यादँ, च्याला व च्यान्हु दतकि यायेगु याइ धका धाइ । 
न्हापांगु जंक्व याइबलय् रथय् सूद्र्यःया चिं तयाः पुज्याकी, निक्वःगु जंक्व याइबलय् तिमिलाया चिं तयाः तिमिला पुज्याकीसा, स्वक्वःगु जंक्व याइबलय् रथय् नाशद्यः, दुगद्यः आदिया चिं तया पूजा याकीगु याइ ।  जंक्व याइबलय् मिजंया उमेर कथं मिसा न्हयाक्वहे दँ दुःसा नापं जंक्व यायेगु याइ । यदि जंक्व याये न्हयो मिजं सित धाःसाः मिसाया हे दँ कथं जंक्व यायेगु याइ । 
 
सी संस्कार :-
 
सी ल्हवनेगु ज्या :-  माली जातिया सु मनू मन्तसाः सीम्हेसित दकले न्हापाँ तुयुगु गाँ वा कापतं फायका तइ । नं छकु सीम्हेसीया म्हय तया बी । च्वय् नं क्वय् नं निप्वा पाल्चा च्याका तइ । सी गुथियात सुचं छ्वइ । म्हयाय्मचा, भिनामचा, छय्मचा, सम्धि खलः व स्यापिंत सीखँ कंके छ्वइ । नापं फागाँ सुइत धायगु सुइत मधायेगु क्वछिना फागाा हयगुव व महयगु खँ नं धया छ्वइ । गुथि पाला वया द्यवं फागाँ फायेका बी । सी गुथियात सुचं छ्वइ । 
गुथीयारपिं फुकं मुने धुंका सीगु साइत स्वया पँचमय् लाः मलाः स्वया मामागु पुजाकर्म याइ ।  न्हापा मनूसीबलय् सीम्हयात सुःलाया तुयु कापतं त्वःपुयाः, ई वाः नंः द्योने तयेगु व पाल्चा नीप्वा च्याकी ।  सीम्हेसित द्यवं फाँगा फायेकी । थ्व दुुफाँगा यात हे गाँ गाँ में गुफाँगा नं धका धाइ । सौसाय्केगु धकाः निगः भ्यगतय् सौतयाः स्वस्तिक च्वयाः सिम्ह सरे यानां पुलुइ प्वःची । गुथीहार पिंस सिथं ज्वलं ताःलाकाः क्वताः नं दयेकी । फुकी भौमस्तय्सं छेंनं पित यने न्हयो अप्पावायेगु वछेंय् पितथने धुंका लासा फांगा, वसन आदि छ्वासय् वायेकी । गां गां में सीथं यंकेत म्हयाय्मचापाखें सीबाजा तयेगु याइ । सीबाजं तय्गुया दुखँ इन्द्रयात खबर बिइगु। यें च्वंपि माली तयसं थौकन्हे सीःबाजं मतस्य सीथं यकीगु खनेदु । अले पाखाकुं थनेगु धकाः सीबाजा थाका भाजनय् सौपाःतयाः मिच्याकाः पाखाकु थने धुनेवं म्हयाय्मचापिसं वा ह्वयेकाः जिलाजंपिसं ताय् अबीर फिपु, धिवा ह्वयकी गुथियार जःलाखःला आदि सकले सनावनेत मुनाः सिथं यंकी ।  दिपय् थ्यंकाः सीम्ह क्वबुयावंइपि व ख्वयावंइपि सकसिनंइ लः त्वंकाः श्रद्धाञ्जलि अर्पण यानाः सीम्हेसित गुथियारपिसं नं लःत्वंके सीधयवं  मितयका दाहसंस्कार याइ । मसानय् थ्यनेवं अबु सीसा तःधीम्हः काय्, माँ सीसा चीधीम्हः काय्ंन तिंप्वाः च्याकाः सीम्हयातः स्वचाःहिलाः मिं तयेगु याइ । मि तये धुनेव ख्वयावंइपि सकले थःगु छेंय् ल्याहाँ वइ । छेँय हानं फुकीपिसं छ्वासय् पिचा वाके छ्वइ । 
मिंतया ल्याहाँ वयंधुकाः पिखालखुइ थ्यनेवं छें च्वंपिंसं सकि, ईका पःकाः, मिं छसलि तयाः ल्हाःतय् लः बियाः वा ताःचा बियाः दुकायेगु याइ । सीम्ह खरानी जुइवं मुक हु धकाः खबर विइवं हाकनं मसानय् वनां नौ चुइकेगु धकाः खरानीयात चुइका छ्वइ । सीम्ह मुका वय धुंकल धका खँ न्यने धुंका तिनि द्याँ लाना च्वंपि म्हयाय्मचा, छेँय् खल व स्यास्या पिंन्स नयगु याइ । मुका मवयकं छुं वस्तुं नं थीके मज्यु धाइ । सीम्ह मुत धका गुथीयार पाखें सुचं वयधुंका स्यापिं म्हयाय्मचा पिंसं चिपं थीके यकी । थःथें चिपं थिके यकी बलय् बजि, चाकुमरी, पालु, चि, व अयला आदि नकेयंकीगु याइ । 
 
               कन्हे कुन्हु थःथिति, इस्तमित्र, पासापिं बिचाःयाये कथं सुथय् स्वःवैसा प्यन्हु दुखुन्हु लोचाःब्याःधकाः सिचुपालु चाकु बजि, चि, पालु आदितयाः म्हयाय्मचा, भिनामचापिं वया चिपँ थिइकेगु याइ । ह्य्न्हु कुन्हु म्ह्याय्मस्तयसं नीसी याना जा क्यं पाःचाय् तया ला आदि न्ह्य्ता धासा तया पिखालखुइ तइ वा खिचायात नकीगु चलन दु । गुलिसियां खुसी वान्छोय् यंकी । उगु न्ह्यन्हुमा जोरय् याइबलय् पाखाजा तयाः बो प्mयाइ । पाखाजा धकाः म्ह्याय्मचां तयाः छेंय् द्धाहाँ मवसे मेंगु छें वनी ।  पाखाजा तैबलय् जा ख्येंय व धासात तया ल, दुरु मत तयाः भ्यगतं त्वः मुइ । उकी तिं कथि निपु नं तिइगु याइ । थ्व इलय् सिम्हःया नापं मेपिं नं ब्वना है यदि व शुद्ध मजुल धाःसा सीम्ह मनूयात दायाः यंकी धैगु धापू दु । थ्व धुंकाः झिंनु दय्का दुब्यंकः वनेगु धकाः सँखानाः म्वल्हुयाः तुयूगु वसः पुनी । अले झिंनिन्हु दुखुन्हु घःसू याइ ।
 
पेश्की ब्वनेगु:-    सीगु झिंस्वन्हु क्वचसेवं पेश्की ब्वनेगु धका पाजु खलः निनिखलकं सःता बालाकं नकेगु याइ । थुकथं पेश्की वनी बलय् छ्वासय् वाःम्ह करे क्यं । मेपि छेँ जःपिं नैं वनी । छत्थु नकेग  पिनेगु त्वनेगु 
मनू सिनां वने धुंकाः निदँ तक पिण्ड थयेगु चलन दु । थुगु ईलय् निसें फःसा दछिया छकः श्राद्ध यायेगु याइ, याये मफुसा दछीया छकः निसलाः बिइगु नं याइ ।  गुलिसियां सिना वना लच्छि छकः मासपिण्ड धकाः थयेगु याइ । 
सिना वंनिपिंगु नामं लत्या, खुला, दकिला व निदँ तिथि तक पिण्ड थयेगु याना च्वंगु दु । सिनां वना भिंmनिन्हुँ घःसू याइबलय् सिकताक्व भ्वय् नइ । पीन्यान्हु दुखुन्हु याइगु पिण्ड विइगु यात लत्या धाइ । थुगु इलय् नं धःसू भ्वय् थें हे भ्वय् नय्गु याइ । दकिला याइबलय् बजिकु ज्वना, प्यता धासा ज्वनां भ्वय् वइ । दकिला खुन्हु थःथितिपिन्सं तुयूगु बखिं वसः हीकेगु वा बर्खि फुकय् यायेगु धाकाः वसः तपुलि व सगं ज्वनां वयेगु याइ । 
सिनां खुला दुखुन्हु सीम्ह मनू नं खुसी तरे याये थाकु्याः च्वनी धैगु कथं पुजा याना पिण्ड वियाः डुंगा व चनं पुरोहितपिन्त दान यानाच्वंगु दु । दच्छितक पिण्ड थइबलय् स्वगू पुस्ताया पिण्ड दयेकेगु याइसा निदँ तिथिया पिण्ड थाइबलय् थःफुकी बा काय् पिनि गुलि नं सिनाः वपिं दु इपिं फुुक्क सिनाः तरे जुइमा धकाः सिक्व ताक्व नाम्ह पिण्ड दयेकेगु याइसा पिण्ड थयेबलय् अकालं सिनां वपिं मनूतय्गु सिनावंपिनि नं नयेखनेमा धका बिकलयम पिण्ड दुथेकाः तयेगु याइ ।

८. मालि समाजया भुमिका:-
 
                माली जाति शिक्षाया ख्यलय् तसकं क्वय् लाना च्वंगु खनेदु । माली जातियागु शैक्षिक उपलब्धि कम जुगुलीं सामाजिक विकास नं कम हे जुगु खनेदु । थ्व जातिया आपा मनूत अशिक्षित व चीमि जुगुलीं  थांैतक नं समाजय् वयाच्वंगु अग्रगामी प्रभाव तापाना च्वंगुदु । अथें जुया थ्व जाति राष्ट्रिय विकासया मूं धारय् सहजरुपं ब्वति कायेमफया च्वंगु खनेदु । थ्व हे समस्या यात समाधान यायेत २०५९ सालं नेपाल माली समाजया पलिस्था जुगु खः । थ्व समाजं माली पिंगु शिक्षा, सामाजिक, आर्थिक, साँस्कृतिक व धार्मिक ख्यःलय् यक्व हे ग्वाहाली बिया वया च्वंगु दु । 
 
                   थ्व समाजं २०५९ साल निसें एस.एल.सी परीक्षाय् पास जुया वपिं  ब्वनामिपिन्त हनाःपौ बिया हपाः बिइगुुु ज्या न्ह्याकुगुु दु । आर्थिक, सामाजिक रुपं यक्व हे क्वय्लाना च्वपिं परिवारया ब्वनामि मस्तयतः छात्रवृत्ति बिइगु ज्या नं न्क्याकुगु दु । थ्व समाजया पलिस्था याना थी थी थासय च्वना वयाच्वं पिनिगु दथुुइ थगुु समस्याया समाधान यायेत सहलह यायेगु ज्या बढे जुगुुलीं सामाजिक चेतना चकंकेत ग्वाहाली जुया वंगु दुु ।
लिधंसा
 
१.  नेपाल माली समाज स्मारिका २०६०.
२.  म्बलष्भ िध्चष्नजत, भम। ल्भउब ि– ज्ष्कतयचथ या तजभ ऋयगलतचथ बलम तजभ एभयउभि, ज्ञडठठ ब्म्।
३.  शुक् सागर श्रेष्ठ, कीर्तिपुरको साँस्कृतिक र पुरातात्वीक इतिहास, २०५७.
४.  पुरुषोत्तमलोचन श्रेष्ठ, भक्तपुरको नवदुर्गा गण , २०६०.